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किस महीने में क्या खाए और क्या नहीं खाए

 * आयुर्वेद के अनुसार किस महीने में क्या खाए और क्या नहीं खाए जिससे रहे निरोगी काया* मौसम के अनुकूल अगर आप भोजन करते है। या फिर खाना-पीना खाते है तो अक्सर आप बड़े-बुजुर्गों के मुख ये शब्द जरूर सुने होंगे। चौते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढ़े बेल। सावन साग, भादो मही, कुवांर करेला, कार्तिक दही। अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना। जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहिं धरै। अर्थात इस दोहा के माध्यम से बताया गया है कि जो आदमी इन चीजों पर अमल करेगा यानी कि नहीं खाएगा। वह इंसान कभी बीमार नहीं होगा। चिकित्सक-वैद्य के पास नहीं जाना पड़ेगा। हिन्दू धर्मशास्त्र के जानकार आज भी कहते है कि आयुर्वेद में भोजन के संबंध में बहुत कुछ लिखा है। जैसे किस सप्ताह में क्या खाना है क्या नहीं। किस तिथि को क्या खाना चाहिए अथवा क्या नहीं। किस महीने में क्या भोजन सही है और क्या नहीं। दरअसल, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। प्रत्येक सप्ताह, तिथि या महीने में मौसम में बदलाव होता है। इस बदलाव को समझकर ही खाना जरूरी है। *किस माह में क्या खाएं?* 💐💐💐💐💐💐💐💐 जिस तरह पूर्वजों को बताया गया है कि चै...

🌕 शरद पूर्णिमा 2025: धन, सुख और सौभाग्य के लिए प्रभावी उपाय व टोटके

🌕 शरद पूर्णिमा 2025: धन, सुख और सौभाग्य के लिए प्रभावी उपाय व टोटके शरद पूर्णिमा हिन्दू पंचांग की अत्यंत शुभ रात मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा पूर्ण तेजस के साथ आकाश में उदित होता है और उसकी चाँदनी में दिव्यता का अद्भुत संगम होता है। शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की रात्रि मानी जाती है और इस दिन किए गए उपाय शीघ्र फलदायी होते हैं। यह दिन धन प्राप्ति, स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। 🌼 शरद पूर्णिमा के प्रभावी उपाय और टोटके 1. लक्ष्मी पूजन और पीपल वृक्ष की आराधना सुबह-सुबह स्नान करके पीपल के पेड़ के नीचे माता लक्ष्मी का पूजन करें और उन्हें घर में निवास के लिए आमंत्रित करें। इससे लक्ष्मी कृपा घर में बनी रहती है। 2. भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा रात में भगवान विष्णु के साथ महालक्ष्मी की पूजा करें। यदि ब्राह्मण के माध्यम से पूजा कराई जाए तो इसका प्रभाव अधिक होता है। 3. चंद्रमा को दूध-चावल से अर्घ्य दें चंद्र उदय के बाद कच्चे दूध, चावल और चीनी के मिश्रण से चंद्रमा को अर्घ्य दें। मंत्र जप करें – “ओम स्त्रां स्त्रीं स्त्रों सः चंद्रमसे नमः।” ...