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माँ दुर्गा को दुर्गा क्यो कहते हैं?

माँ दुर्गा को दुर्गा क्यो कहते हैं? हमारे सनातन धर्म में प्रत्येक देवी-देवता से जुड़े तथ्य हमेशा से ही रोचकता पैदा करते रहे हैं, फिर वह चाहे अपने भक्तों को वरदान देने के संदर्भ में हो या फिर किसी दुष्ट प्राणी को दंड देने की बात हो, शास्त्रों की पौराणिक कथायें हमें पल-पल अचंभित करती हैं, कथाओं के साथ ही विभिन्न देवी-देवताओं के प्राकट्य,  तथा उनके नाम से जुड़ी कथायें भी बहुत रोचक हैं। माँ दुर्गा के नाम से जुड़ी एक कथा काफी प्रचलित है, माना जाता है कि मां दुर्गा जिन्हें मां काली के नाम से भी जाना जाता है, उनका नाम एक बड़ी घटना के बाद ही दुर्गा पड़ा था, श्री दुर्गा सप्तशती में वर्णित एक कथा के अनुसार एक दुष्ट प्राणी पर विजय प्राप्त करने के पश्चात् ही देवी को दुर्गा नाम से बुलाया गया। यह तब की बात है जब प्रह्लाद के वंश में दुर्गम नाम का एक अति भयानक, क्रूर और पराक्रमी दैत्य पैदा हुआ, इस दैत्य के जीवन का एक ही मकसद था- सभी देवी-देवताओं को पराजित कर समस्त सृष्टि पर राज करना, लेकिन जब तक महान देवता इस दुनिया में मौजूद थे, तब तक दुर्गम के लिए यह करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन भी थ...

माँ महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित

माँ महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित अयि गिरि-नन्दिनि नंदित-मेदिनि विश्व-विनोदिनि नंदनुते गिरिवर विंध्य शिरोधि-निवासिनि विष्णु-विलासिनि जिष्णुनुते। भगवति हे शितिकण्ठ-कुटुंबिनि भूरि कुटुंबिनि भूरि कृते जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैलसुते॥ अर्थ 〰️〰️ हे गिरिपुत्री, पृथ्वी को आनंदित करने वाली, संसार का मन मुदित रखने वाली, नंदी द्वारा नमस्कृत,पर्वतप्रवर विंध्याचल के सबसे ऊंचे शिखर पर निवास करने वाली, विष्णु को आनंद देने वाली, इंद्रदेव द्वारा नमस्कृत, नीलकंठ महादेव की गृहिणी, विशाल कुटुंब वाली, विपुल मात्रा में निर्माण करने वाली देवी, तुम्हारी जय हो, जय हो। हे महिषासुर का घात करने वाली, सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! स्तोत्र 〰️〰️ सुरवर-वर्षिणि दुर्धर-धर्षिणि दुर्मुख-मर्षिणि हर्षरते त्रिभुवन-पोषिणि शंकर-तोषिणि किल्बिष-मोषिणि घोषरते। दनुज निरोषिणि दितिसुत रोषिणि दुर्मद शोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैलसुते॥ अर्थ 〰️〰️ हे सुरों पर वरदानों का वर्षंण करने वाली, दुर्मुख और दुर्धर नामक दैत्यों का संहार करने वाली, सदा हर्षित रह...