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जानिए किस कामना के लिए किस चीज से अभिषेक करें..

रुद्राभिषेक किससे करें?.... . 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *श्लोक* 〰️〰️〰️ *जलेन वृष्टिमाप्नोति व्याधिशांत्यै कुशोदकै* *दध्ना च पशुकामाय श्रिया इक्षुरसेन वै।* *मध्वाज्येन धनार्थी स्यान्मुमुक्षुस्तीर्थवारिणा।* *पुत्रार्थी पुत्रमाप्नोति पयसा चाभिषेचनात।।* *बन्ध्या वा काकबंध्या वा मृतवत्सा यांगना।* *जवरप्रकोपशांत्यर्थम् जलधारा शिवप्रिया।।* *घृतधारा शिवे कार्या यावन्मन्त्रसहस्त्रकम्।* *तदा वंशस्यविस्तारो जायते नात्र संशयः।* *प्रमेह रोग शांत्यर्थम् प्राप्नुयात मान्सेप्सितम।* *केवलं दुग्धधारा च वदा कार्या विशेषतः।* *शर्करा मिश्रिता तत्र यदा बुद्धिर्जडा भवेत्।* *श्रेष्ठा बुद्धिर्भवेत्तस्य कृपया शङ्करस्य च!!* *सार्षपेनैव तैलेन शत्रुनाशो भवेदिह!* *पापक्षयार्थी मधुना निर्व्याधिः सर्पिषा तथा।।* *जीवनार्थी तू पयसा श्रीकामीक्षुरसेन वै।* *पुत्रार्थी शर्करायास्तु रसेनार्चेतिछवं तथा।* *महलिंगाभिषेकेन सुप्रीतः शंकरो मुदा।* *कुर्याद्विधानं रुद्राणां यजुर्वेद्विनिर्मितम्।*    *अर्थात* 〰️〰️〰️ *जल से रुद्राभिषेक करने पर* —               वृष्टि होती है। *कुशा ...

पूजा से पहले शौच और आचमन करना क्यों जरूरी??

  पूजा से पहले शौच और आचमन करना क्यों जरूरी??????? 〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️🔸〰️〰️ * सकल सौच करि राम नहावा। सुचि सुजान बट छीर मगावा॥ अनुज सहित सिर जटा बनाए। देखि सुमंत्र नयन जल छाए॥ भावार्थ:-शौच के सब कार्य करके (नित्य) पवित्र और सुजान श्री रामचन्द्रजी ने स्नान किया। फिर बड़ का दूध मँगाया और छोटे भाई लक्ष्मणजी सहित उस दूध से सिर पर जटाएँ बनाईं। यह देखकर सुमंत्रजी के नेत्रों में जल छा गया॥ संध्या वंदन के समय मंदिर या एकांत में शौच, आचमन, प्राणायामादि कर गायत्री छंद से निराकार ईश्वर की प्रार्थना की जाती है। संधिकाल में ही संध्या वंदन किया जाता है। वेदज्ञ और ईश्‍वरपरायण लोग इस समय प्रार्थना करते हैं। ज्ञानीजन इस समय ध्‍यान करते हैं। भक्तजन कीर्तन करते हैं।   पुराणिक लोग देवमूर्ति के समक्ष इस समय पूजा या आरती करते हैं। तब सिद्ध हुआ की संध्योपासना या हिन्दू प्रार्थना के चार प्रकार हो गए हैं- (1)प्रार्थना-स्तुति, (2)ध्यान-साधना, (3)कीर्तन-भजन और (4)पूजा-आरती। व्यक्ति की जिस में जैसी श्रद्धा है वह वैसा करता है।    भारतीय परंपरा में पूजा, प्रार्थना और दर्शन से पहले श...

पूजा में प्रयोग होने वाले शब्दों का मतलब

  पूजा में प्रयोग होने वाले कुछ शब्द और उनके अर्थ। 1. पंचोपचार – गन्ध , पुष्प , धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने को ‘पंचोपचार’ कहते हैं | 2. पंचामृत – दूध , दही , घृत , मधु { शहद ] तथा शक्कर इनके मिश्रण को ‘पंचामृत’ कहते हैं | 3. पंचगव्य – गाय के दूध , घृत , दही मूत्र तथा गोबर इन्हें सम्मिलित रूप में ‘पंचगव्य’ कहते हैं | 4. षोडशोपचार – आवाहन् , आसन , पाध्य , अर्घ्य , आचमन , स्नान , वस्त्र, अलंकार , सुगंध , पुष्प , धूप , दीप , नैवैध्य , ,अक्षत , ताम्बुल तथा दक्षिणा इन सबके द्वारा पूजन करने की विधि को ‘षोडशोपचार’ कहते हैं | 5. दशोपचार – पाध्य , अर्घ्य , आचमनीय , मधुपक्र , आचमन , गंध , पुष्प , धूप , दीप तथा नैवैध्य द्वारा पूजन करने की विधि को ‘दशोपचार’ कहते हैं | 6. त्रिधातु – सोना , चांदी और लोहा |कुछ आचार्य सोना , चांदी, तांबा इनके मिश्रण को भी ‘त्रिधातु’ कहते हैं | 7. पंचधातु – सोना , चांदी , लोहा, तांबा और जस्ता | 8. अष्टधातु – सोना , चांदी , लोहा , तांबा , जस्ता , रांगा , कांसा और पारा | 9. नैवैध्य – खीर , मिष्ठान आदि मीठी वस्तुये | 10. नवग्रह – सूर्य , चन्द्र , मंगल , बुध,...

नवरात्रि में कन्या पूजन विधि

 नवरात्रि पर्व कन्या पूजन विधान विशेष 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 नवरात्र पर्व  के दौरान कन्या पूजन का बडा महत्व है। नौ कन्याओं को नौ देवियों के प्रतिविंब के रूप में पूजने के बाद ही भक्त का नवरात्र व्रत पूरा होता है। अपने सामर्थ्य के अनुसार उन्हें भोग लगाकर दक्षिणा देने मात्र से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं और भक्तों को उनका मनचाहा वरदान देती हैं। कन्या पूजन के लिए निर्दिष्ट दिन 〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰 कुछ लोग नवमी के दिन भी कन्या पूजन करते हैं लेकिन अष्टमी के दिन कन्या पूजन करना श्रेष्ठ रहता है। कन्याओं की संख्या 9 हो तो अति उत्तम नहीं तो दो कन्याओं से भी काम चल सकता है। इस वर्ष इन तिथियों को लेकर उलझन की स्थिति इसलिए है क्योंकि 23 तारीख से सप्तमी उपरांत अष्टमी और 24 तारीख को अष्टमी और नवमी तिथि लग रही है। यही स्थिति दशमी तिथि को लेकर भी है क्योंकि 25 तारीख को नवमी उपरांत दशमी लग रही है। इसलिए उलझन यह है कि किस दिन कौन सी तिथि मान्य होगी?  इस विषय में हमारे शास्त्र और धर्मग्रंथ का प्रमाण यथोचित दिया जा रहा है? शास्त्रों में बताया गया है कि जिस दिन सूर्योदय के समय आश्विन शुक्ल अष्टमी तिथ...

नाग पंचमी - विशेष

नागपंचमी (श्रावण पंचमी) 25 जुलाई विशेष 〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️🌸〰️〰️ श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस पर्व पर प्रमुख नाग मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है और भक्त नागदेवता के दर्शन व पूजा करते हैं। सिर्फ मंदिरों में ही नहीं बल्कि घर-घर में इस दिन नागदेवता की पूजा करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि जो भी इस दिन श्रद्धा व भक्ति से नागदेवता का पूजन करता है उसे व उसके परिवार को कभी भी सर्प भय नहीं होता। इस बार यह पर्व 25 जुलाई, शनिवार को है। इस दिन नागदेवता की पूजा किस प्रकार करें, इसकी विधि इस प्रकार है।  पूजन विधि 〰️〰️〰️〰️ नागपंचमी पर सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद सबसे पहले भगवान शंकर का ध्यान करें नागों की पूजा शिव के अंश के रूप में और शिव के आभूषण के रूप में ही की जाती है। क्योंकि नागों का कोई अपना अस्तित्व नहीं है। अगर वो शिव के गले में नहीं होते तो उनका क्या होता। इसलिए पहले भगवान शिव का पूजन करेंगे।  शिव का अभिषेक करें, उन्हें बेलपत्र और जल चढ़ाएं। इसके बाद शिवजी के गले में विराजमान नागों की पूजा करे। नागों को हल्दी,...