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शमी वृक्ष की उपयोगिता)

 --------: शमी वृक्ष की उपयोगिता :------ * शमी वृक्ष,  जेठ के महीने में भी हरा रहता है। ऐसी गर्मी में , जब रेगिस्तान में जानवरों के लिए,  धूप से बचने का कोई सहारा नहीं होता है,  तब यह पेड़ छाया देता है। जब खाने को कुछ नहीं होता है,  तब यह चारा देता है, जो लूंग कहलाता है। * इसका फूल मींझर कहलाता है। इसका फल सांगरी कहलाता है, जिसकी सब्जी बनाई जाती है। यह फल सूखने पर, खोखा कहलाता है जो सूखा मेवा है। * इसकी लकडी मजबूत होती है , जो किसान के लिए जलाने और फर्नीचर बनाने के काम आती है। इसकी जड़ से,  हल बनता है। * वराहमिहिर के अनुसार,  जिस साल शमी वृक्ष ज्यादा फूलता - फलता है । उस साल सूखे की स्थिति का निर्माण होता है। विजयादशमी के दिन,  इसकी पूजा करने का,  एक तात्पर्य यह भी है कि,  यह वृक्ष आने वाली कृषि विपत्ती का,  पहले से संकेत दे देता है । जिससे किसान पहले से भी,  ज्यादा पुरुषार्थ करके आनेवाली विपत्ती से निजात पा सकता है। * अकाल के समय,  रेगिस्तान के आदमी और जानवरों का , यही एक मात्र सहारा है। सन्  १८९९ में,  दुर्भिक...

शनि देव

  शनिदेव की पौराणिक कथा और रहस्य   प्रत्येक इंसान के जीवन मे उतार चढ़ाव लगे ही रहते है इनका मुख्य कारण पुर्व जन्म कृत कर्म ही होते है। ज्योतिषी मान्यताओं के अनुसार हमारे कर्मो के अनुसार ही ग्रह फल देते है। पौराणिक ग्रंथो में शनि देव को न्यायाधीध के रूप में दर्शाया गया है। शनि देव सदैव से जिज्ञासा का केंद्र रहे हैं।  पौपौराणिक कथाओं के अनुसार शनिदेव कश्यप वंश की परंपरा में भगवान सूर्य की पत्नी छाया के पुत्र हैं। शनिदेव को सूर्य पुत्र के साथ साथ पितृ शत्रु भी कहा जाता है। शनिदेव के भाई-बहन मृत्यु देव यमराज, पवित्र नदी यमुना व क्रूर स्वभाव की भद्रा हैं।  शनिदेव का विवाह चित्ररथ की बड़ी पुत्री से हुआ था। ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को शनिदेव का जन्म उत्सव मनाया जाता है। शनिदेव का जन्म स्थान सौराष्ट्र में शिंगणापुर माना गया है। हनुमान, भैरव, बुध व राहू को वे अपना मित्र मानते हैं। शनिदेव का वाहन गिद्ध है और उनका रथ लोहे का बना हुआ है।  शनि देव के दस नाम: -  यम, बभ्रु, पिप्पलाश्रय, कोणस्थ, सौरि, शनैश्चर, कृष्ण, रोद्रान्तक, मंद, पिंगल।  शनिदेव अपना शुभ...

शनि देव के बारे में विशेष जानकारी

राजा को भी क्षण में रंक कर देने वाले शनिदेव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी!!!!!! ▪️शनिदेव सूर्यदेव और छाया के पुत्र हैं। सूर्य समस्त ग्रहों के राजा हैं तो उनके पुत्र युवराज शनिदेव न्यायाधीश हैं। ▪️शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को हुआ था इसीलिए शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या (शनिचरी अमावस्या) शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए बहुत शुभ मानी जाती है । ▪️शनि का रंग काला, अवस्था वृद्ध, आकृति दीर्घ, लिंग नपुंसक है । ▪️शनि के चार हाथों में बाण, वर, शूल और धनुष है । उनका वाहनगिद्ध है । ▪️शनि का गोत्र कश्यप व जाति शूद्र है ।  ▪️वे सौराष्ट्र के अधिपति हैं । ▪️शनिदेव को मन्द, शनैश्चर, सूर्यसूनु, सूर्यज, अर्कपुत्र, नील, भास्करी, असित, पंगु, क्रूरलोचन, छायात्मज आदि नामों से जाना जाता है । ▪️शनिदेव का वार शनिवार, धातु लोहा, रत्न नीलम, उपरत्नजमुनिया या लाजावर्त, जड़ी बिछुआ, बिच्छोलमूल (हत्था जोड़ी)  व समिधा शमी  है ।  ▪️शनि का आधिपत्य मकर और कुम्भ राशि तथा पुष्य, अनुराधा एवं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र पर है ।  ▪️शनि वायुतत्त्व प्रधान ग्रह है । ▪️अंकज्योतिष के अनुसार प्रत्येक मही...