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दीपावली पूजन विधि

  दीपावली महात्मय एवं पूजन विधि  〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ हर वर्ष भारतवर्ष में दिवाली का त्यौहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. प्रतिवर्ष यह कार्तिक माह की अमावस्या को मनाई जाती है. रावण से दस दिन के युद्ध के बाद श्रीराम जी जब अयोध्या वापिस आते हैं तब उस दिन कार्तिक माह की अमावस्या थी, उस दिन घर-घर में दिए जलाए गए थे तब से इस त्योहार को दीवाली के रुप में मनाया जाने लगा और समय के साथ और भी बहुत सी बातें इस त्यौहार के साथ जुड़ती चली गई। “ब्रह्मपुराण” के अनुसार आधी रात तक रहने वाली अमावस्या तिथि ही महालक्ष्मी पूजन के लिए श्रेष्ठ होती है. यदि अमावस्या आधी रात तक नहीं होती है तब प्रदोष व्यापिनी तिथि लेनी चाहिए. लक्ष्मी पूजा व दीप दानादि के लिए प्रदोषकाल ही विशेष शुभ माने गए हैं। दीपावली पूजन के लिए पूजा स्थल एक  दिन पहले से सजाना चाहिए पूजन सामग्री भी दिपावली की पूजा शुरू करने से पहले ही एकत्रित कर लें। इसमें अगर माँ के पसंद को ध्यान में रख कर पूजा की जाए तो शुभत्व की वृद्धि होती है। माँ के पसंदीदा रंग लाल, व् गुलाबी है। इसके बाद फूलों की बात करें तो कमल और गुलाब मां लक्ष्मी क...

कार्तिक मास में दीपदान जरूर करें

आज से कार्तिक मास आरंभ हो गया है,कार्तिकमास में दीपदान का बहुत महत्व है। आज हम आपको कार्तिक मास में दीपदान की विधि बतायेंगे!!!!!!!!! कार्तिक मास में प्रतिदिन प्रात:काल स्नान करके कोमल तुलसीदलों से भगवान विष्णु या दामोदर कृष्ण की पूजा करके रात्रि में आकाशदीप देते (प्रज्ज्वलित करते) हैं । इसके लिए एक लम्बे बांस में लालटेन रखकर उसमें ‘आकाशदीप’ जलाते हैं, अथवा भगवान के मन्दिर के मुंडेर पर एक मास तक दीपदान किया जाता है । दीप प्रज्ज्वलित करते समय इस मन्त्र का उच्चारण किया जाता है— दामोदराय विश्वाय विश्वरूपधराय च । नमस्कृत्वा प्रदास्यामि व्योमदीपं हरिप्रियम् ।। अर्थात्—मैं सबमें स्थित और विश्वरूपधारी भगवान दामोदर को नमस्कार करके यह आकाशदीप देता हूँ, जो भगवान को अत्यन्त प्रिय है ।’ महालक्ष्मी सहित भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए शरद पूर्णिमा से पूरे मास आकाशदीप प्रज्जवलित करना चाहिए इससे मनुष्य यम की यातना से मुक्त हो जाता है और अपने परिवार के साथ सभी प्रकार के भोगों को भोग करके अंत में विष्णुलोक को प्राप्त होता है । भगवान दामोदर (विष्णु) की प्रसन्नता के लिए  रात्रि के समय मन्...