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प्रणाम के नियम

 * प्रणाम या नमस्कार* *या* *अभिवादनके मुख्य नियम* ---------------------------------- अभिवादन प्रणाम या नमस्कार के कुछ ऐसे नियम शास्त्रों में बताए हैं, जो जीवन में अत्यंत आवश्यक हैं प्रायः हम लोग जिन्हें नहीं जानते ,उन नियमों का कुछ अंश इस लेख में लिखा गया है। आप सभी लोग इसे अवश्य ही पढ़ें और परिपालन भी करें। *अभिवादन शीलस्य नित्यं वृद्धोपसेविनः!*  *चत्वारि तस्य वर्धन्ते आयुर्विद्या यशो बलम् ||* मनुः२/१२१||## अर्थात् जो वृद्धजनों,गुरुजनों,तथा माता-पिताको नित्य प्रणाम करता हैं और उनकी सेवा करता हैं,उसके आयु,विद्या,यश और बलकी वृद्धि होती हैं | *मातापितरमुत्थायपूर्वमेवाभिवादयेत् |* *आचार्यमथवाप्यन्यं तथायुर्विन्दते महत् ||* १०४/४३-४४महाभा० || महाभारतमें भी बताया गया हैं कि अभिवादनसे दीर्घ अयुकी प्राप्ति होती हैं ||  अपनेसे बड़े आनेपर उन्हें देखतें ही खड़े हो जाना चाहिये | यदि विशेष स्थिति न हो तो उनके समीप आनेकी प्रतिक्षा नहीं करनी चाहिये | यह सर्वसामान्य हैं कि मनुष्य शरीरमें एक प्रकारकी विद्युत-शक्ति हैं |  दुर्बलको प्रबल विद्युत् अपनी और खींचती हैं | शास्त्रानुसार कि...