माँ महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र हिन्दी अर्थ सहित अयि गिरि-नन्दिनि नंदित-मेदिनि विश्व-विनोदिनि नंदनुते गिरिवर विंध्य शिरोधि-निवासिनि विष्णु-विलासिनि जिष्णुनुते। भगवति हे शितिकण्ठ-कुटुंबिनि भूरि कुटुंबिनि भूरि कृते जय जय हे महिषासुर-मर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैलसुते॥ अर्थ 〰️〰️ हे गिरिपुत्री, पृथ्वी को आनंदित करने वाली, संसार का मन मुदित रखने वाली, नंदी द्वारा नमस्कृत,पर्वतप्रवर विंध्याचल के सबसे ऊंचे शिखर पर निवास करने वाली, विष्णु को आनंद देने वाली, इंद्रदेव द्वारा नमस्कृत, नीलकंठ महादेव की गृहिणी, विशाल कुटुंब वाली, विपुल मात्रा में निर्माण करने वाली देवी, तुम्हारी जय हो, जय हो। हे महिषासुर का घात करने वाली, सुन्दर जटाधरी गिरिजा ! स्तोत्र 〰️〰️ सुरवर-वर्षिणि दुर्धर-धर्षिणि दुर्मुख-मर्षिणि हर्षरते त्रिभुवन-पोषिणि शंकर-तोषिणि किल्बिष-मोषिणि घोषरते। दनुज निरोषिणि दितिसुत रोषिणि दुर्मद शोषिणि सिन्धुसुते जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्य कपर्दिनि शैलसुते॥ अर्थ 〰️〰️ हे सुरों पर वरदानों का वर्षंण करने वाली, दुर्मुख और दुर्धर नामक दैत्यों का संहार करने वाली, सदा हर्षित रह...
This Blog is just a collection of knowledge and information which may be helpful for us, from different sources based on Hindu Mythology. We compile content from various sources to present a broad view. While we strive for accuracy, we cannot take responsibility for any inaccuracies or misinterpretations in the posts. We welcome your feedback and suggestions to help us improve and ensure the information we share is as accurate and respectful as possible. Join us on this journey of exploration a