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पापमोचनी एकादशी विशेष

 पापमोचिनी एकादशी 28 मार्च विशेष 〰️〰️🌼〰️〰️🌼🌼〰️〰️🌼〰️〰️ हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। हिन्दू धर्म में कहा गया है कि संसार में उत्पन्न होने वाला कोई भी ऐसा मनुष्य नहीं है जिससे जाने अनजाने पाप नहीं हुआ हो। पाप एक प्रकार की ग़लती है जिसके लिए हमें दंड भोगना होता है। ईश्वरीय विधान के अनुसार पाप के दंड से बचा जा सकता हैं अगर पापमोचिनी एकादशी का व्रत रखें। पौराणिक संदर्भ 〰️〰️🌼〰️〰️ पुराणों के अनुसार चैत्र कृष्ण पक्ष की एकादशी पाप मोचिनी कहलाती है अर्थात पाप को नष्ट करने वाली। स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने इसे अर्जुन से कहा है। कथा के अनुसार भगवान अर्जुन से कहते हैं, राजा मान्धाता ने एक समय में लोमश ऋषि से जब पूछा कि प्रभु यह बताएं कि मनुष्य जो जाने अनजाने पाप कर्म करता है उससे कैसे मुक्त हो सकता है। इस वर्ष पाप मोचिनी एकादशी का व्रत 7 अप्रैल को स्मार्त एवं वैष्णव सम्प्रदाय से जुड़े भक्तो द्वारा एवं 8 अप्रैल के दिन निम्बार्क सम्प्रदाय से जुड़े भक्तो द्वारा किया जाए...