सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

भृंगी लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

भृंगी की कथा

 भृंगी की कथा ~~~~~~~~~~~ महादेव के गणों मे एक हैं भृंगी। एक महान शिवभक्त के रुप में भृंगी का नाम अमर है। कहते हैं जहां शिव होंगे वहां गणेश, नंदी, श्रृंगी, भृंगी, वीरभद्र का वास स्वयं ही होगा। शिव-शिवा के साथ उनके ये गण अवश्य चलते हैं। इनमें से सभी प्रमुख गणों के बारे में तो कहानियां प्रचलित हैं। जैसे दक्ष यज्ञध्वंस के लिए वीरभद्र उत्पन्न हुए।  मां पार्वती ने श्रीगणेश को उत्पन्न किया। नंदी तो शिव के वाहन हैं जो धर्म के अवतार हैं। शिलाद मुनि के पुत्र के रूप में जन्म लेकर शिवजीके वाहन बने नंदी। आपने यह सब कथाएं खूब सुनी होंगी पर क्या प्रमुख शिवगण भृंगी की कथा सुनी है?भृंगी की खास बात यह हैं कि उनके तीन पैर हैं। शिव विवाह के लिए चलीबारात में उनका जिक्र मिलता हैं  बिनु पद होए कोई.. बहुपद बाहू” (यानी शिवगणों में कई बिना पैरों के थे और किसी के पास कई पैर थे) ये पद तुलसीदासजी ने भृंगी के लिए ही लिखा है।भृंगी के तीन पैर कैसे हुए? इसके पीछे एक कथा है जो हमें बताती है कि उमा-शंकर के बीच का प्रेम कितना गहरा है।  ये दोनों वस्तुत: एक ही हैं। दरअसल भृंगी की एक अनुचित जिद ही वजह से...