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गर्भाधान संस्कार के विषय में पूरी जानकारी

पुरुष के वीर्य और स्त्री के रज से मन सहित जीव (जीवात्मा) का संयोग जिस समय होता है उसे *"गर्भाधान काल"* कहते हैं। *गर्भाधान का संयोग (काल) कब आता है..⁉* इसे ज्योतिष शास्त्र ब-खूबी बता रहा है। 🌸 *"चरक संहिता'" के अनुसार:–* आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी इन पंच महाभूतों और इनके गुणों से युक्त हुआ आत्मा गर्भ का रुप ग्रहण करके पहले महीने में अस्पष्ट शरीर वाला होता है। सुश्रुत ने इस अवस्था को ‘कलल’ कहा है। ‘कलल’ भौतिक रूप से रज, वीर्य व अण्डे का संयोग है। 🌸 *"शुक्ल पक्ष की दशमी से कृष्ण पक्ष की पंचमी तक" चंद्रमा को, शास्त्रकारों ने पूर्णबली माना है।* *★शुक्ल पक्ष के चंद्रमा की कलाऐं जैसे-जैसे बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे स्त्री-पुरुषों के मन में "प्रसन्नता और काम-वासना" बढ़ती है। जब गोचरीय Transitional चंद्रमा का, शुक्र अथवा गुरु से दृष्टि या युति संबंध होता है, तब इस फल की वृद्धि होती है।* 🌸 *सफल fruitfully प्रेम की*                   *डेटिंग का समय:-* ---+---+---+---+---+---+---+---+--+--- 🌸 ★जिस समय आपकी राशि से गोचर का चंद्रमा ❌चैथा...