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पितृ स्त्रोत एवं पितृ स्तोत्र का अर्थ !

 इस स्तोत्र का नित्य पाठ करना चाहिए।।  ।।पितृ स्त्रोत पढ़ने के चमत्कारी लाभ ।।  श्राद्ध पक्ष में पितृ स्तोत्र का पाठ करने से मिलेगा पितृ दोष से छुटकारा, पढ़िए पितृ स्तोत्र भावार्थ के साथ एवं पढ़िए इसके लाभ पितृ स्त्रोत एवं पितृ स्तोत्र का अर्थ ! ।।अथ पितृस्तोत्र ।। 1- अर्चितानाममूर्तानां पितृणां दीप्ततेजसाम्। नमस्यामि सदा तेषां ध्यानिनां दिव्यचक्षुषाम्।। हिन्दी अर्थ – जो सबके द्वारा पूजा किये जाने योग्य, अमूर्त, अत्यन्त तेजस्वी, ध्यानी तथा दिव्यदृष्टि से पूर्ण रूप से सम्पन्न है। उन पितरों को मैं सदा प्रणाम करता हूं। 2- इन्द्रादीनां च नेतारो दक्षमारीचयोस्तथा। सप्तर्षीणां तथान्येषां तान् नमस्यामि कामदान्।। हिन्दी अर्थ– जो इन्द्र आदि समस्त देवताओं, दक्ष, मारीच, सप्तर्षियों तथा दूसरों के भी नेता है, हर मनोकामना की पूर्ति करने वाले उन पितरो को मैं प्रणाम करता हूं। 3- मन्वादीनां च नेतार: सूर्याचन्दमसोस्तथा। तान् नमस्यामहं सर्वान् पितृनप्युदधावपि।। हिन्दी अर्थ– जो मनु आदि राजर्षियों, मुनिश्वरों तथा सूर्य देव और चन्द्र देव के भी नायक है। उन समस्त पितरों को मैं जल और समुद्र में भी प...

पितरों के रुष्ट होने का कारण और प्रसन्न करने के उपाय

 घर के प्रेत या पितर रुष्ट होने के लक्षण और उपाय ================================ बहुत जिज्ञासा होती है आखिर ये पितृदोष है क्या? पितृ -दोष शांति के सरल उपाय पितृ या पितृ गण कौन हैं ?आपकी जिज्ञासा को शांत करती विस्तृत प्रस्तुति। पितृ गण हमारे पूर्वज हैं जिनका ऋण हमारे ऊपर है ,क्योंकि उन्होंने कोई ना कोई उपकार हमारे जीवन के लिए किया है मनुष्य लोक से ऊपर पितृ लोक है,पितृ लोक के ऊपर सूर्य लोक है एवं इस से भी ऊपर स्वर्ग लोक है।  आत्मा जब अपने शरीर को त्याग कर सबसे पहले ऊपर उठती है तो वह पितृ लोक में जाती है ,वहाँ हमारे पूर्वज मिलते हैं अगर उस आत्मा के अच्छे पुण्य हैं तो ये हमारे पूर्वज भी उसको प्रणाम कर अपने को धन्य मानते हैं की इस अमुक आत्मा ने हमारे कुल में जन्म लेकर हमें धन्य किया इसके आगे आत्मा अपने पुण्य के आधार पर सूर्य लोक की तरफ बढती है। वहाँ से आगे ,यदि और अधिक पुण्य हैं, तो आत्मा सूर्य लोक को भेज कर स्वर्ग लोक की तरफ चली जाती है,लेकिन करोड़ों में एक आध आत्मा ही ऐसी होती है ,जो परमात्मा में समाहित होती है जिसे दोबारा जन्म नहीं लेना पड़ता मनुष्य लोक एवं पितृ लोक में बहुत स...

पितृदोष - क्या है, लक्षण, कारण और निवारण

  पित्र दोष का प्रभाव ,कारण और निवारण -  घर में पितृ दोष होगा तो घर के बच्चे की शिक्षा , दिमाग , व्यवहार पर अच्छा प्रभाव नहीं पड़ता। जिन जातकों को पितृ दोष होता है उनके बहुत से कारण होते है की हमारे अपने पितरों से सम्बन्ध अच्छे नहीं हो पाते , कारण , आपके जीवन में रुकावटें , परेशानियाँ और क्या नहीं होता* पितृ दोष कही न कही अनेको दोषों को उत्पन्न करने वाला होता है जैसे की वंश न बढ़ने का दोष , असफलता मिलने का दोष , बाधा दोष और भी बहुत कुछ । तो पित्र पक्ष में की गयी पूजा और तर्पण अगर विधि विधान और मन लगाकर किया जाए तो अच्छे फल देने वाली सिद्ध होती है । हर कार्य में नाकामी हाथ लगाना , घर में हमेशा कलह रहना , बीमारी घर के सदस्यों को चाहे छोटी हो या बड़ी घेरे रखती है , यह सब लक्षण पितृ दोषघर में है इसको बताते है । और अगर घर में पितृ दोष है तो किसी भी सदस्य को सफलता आसानी से हाथ नहीं लगती । पितृ दोष कुंडली में है अगर , तो कुंडली के अच्छे ग्रह उतना अच्छा फल जितना उन्हें देना चाहिए ।  घर के सभी लोग आपस में झगड़ते है , घर के बच्चों के विवाह देरी से होते है , और काफी दिक्कतों का सामना भ...

पितृदोष से बचने का बहुत सरल उपाय

: पितृदोष की पूजा नहीं करा सकते हैं तो 3 उपाय से मिलेगा लाभ :  जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है पितृदोष यानी हमारे पूर्वजों का ठीक से श्राद्ध कर्म ना होने के कारण घर में आने वाली परेशानी। पितृदोष है या नहीं ये किसी इंसान की कुंडली से भी पता किया जाता है। इसका सीधा तरीका है कि अगर कुंडली में सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु-केतु में से कोई एक ग्रह बैठा हो तो इसे पितृदोष कहा जाता है। नीचे दिए गए 6 में से किन्हीं भी तीन उपायों को कर लेने से पितृदोष से राहत मिलती है। ज्योतिष में सूर्य को पिता कहा गया है, चंद्रमा को माता। अगर इन दोनों ग्रहों में से किसी एक के साथ राहु या केतु हों तो ये ग्रह दूषित हो जाते हैं। इसे ही पितृदोष कहा जाता है। अगर पितृदोष हो तो कई सारी समस्याएं आती हैं। इनकी शांति के लिए पितृदोष की पूजा होती है, जिसमें सभी जाने या अनजाने पितरों के लिए तर्पण-श्राद्ध किया जाता है। अगर आपके पास पूजा कराने के लिए समय या संसाधनों का अभाव हो तो आप कुछ छोटे-छोटे उपायों से अपने पितृदोष की शांति कर सकते हैं।                       ये होता है...

कैसे करे पितृ दोष को दूर और पितृ शांति

कैसे करे पितृ दोष को दूर  और पितृ शांति : पितृ दोष को दूर करने का सबसे सीधा तरीका तो यही है की आप अपने पितरो को अच्छे से मनाये , उनकी नाराजगी को दूर करे और उन्हें उनका सम्मान दे | श्राद्ध पक्ष में पूजा विधि सेपितरो का तर्पण किया जाना चाहिए |  इसके लिए यह जरुर करे पितृ शांति के उपाय | पितर आदर सम्मान चाहते है | किसी भी शुभ कार्य , मांगलिक कार्य , पूजा पाठ में हमें उनको जरुर याद करना चाहिए । उन्हें पूर्ण सम्मान और श्रद्दा भाव से पूजना चाहिए | जब भी आप पूजा करे तब पूजा के बाद ईश्वर से अपने ज्ञात और अज्ञात पितरो के हित के लिए भगवान से कामना करे | अपने पितरो से भूलवश कोई भी अपराध हुआ हो तो उसकी क्षमा मांगे | अमावस्या के दिन हलवा और खीर का भोग अपने ज्ञात पितरो को लगाये | अमावस्या के दिन स्टील के लोटे में कच्चा दूध , दो लौंग , दो बतासे , घी, काले तील लेकर संध्या के समय पीपल के पेड़ पर चढ़ा दे फिर एक जनेऊ चढ़ाये | इससे पितृ देव खुश होते है | 5.प्रत्येक अमावस्या को गाय को पांच फल भी खिलाने चाहिए अमावस्या के दिन किसी बबूल के पेड़ के निचे संध्या को पितरो को समर्पित करते हुए भ...