बुधवार, 22 अक्टूबर 2025

किस महीने में क्या खाए और क्या नहीं खाए

 *आयुर्वेद के अनुसार किस महीने में क्या खाए और क्या नहीं खाए जिससे रहे निरोगी काया*


मौसम के अनुकूल अगर आप भोजन करते है। या फिर खाना-पीना खाते है तो अक्सर आप बड़े-बुजुर्गों के मुख ये शब्द जरूर सुने होंगे। चौते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढ़े बेल। सावन साग, भादो मही, कुवांर करेला, कार्तिक दही। अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना। जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहिं धरै। अर्थात इस दोहा के माध्यम से बताया गया है कि जो आदमी इन चीजों पर अमल करेगा यानी कि नहीं खाएगा। वह इंसान कभी बीमार नहीं होगा। चिकित्सक-वैद्य के पास नहीं जाना पड़ेगा।


हिन्दू धर्मशास्त्र के जानकार आज भी कहते है कि आयुर्वेद में भोजन के संबंध में बहुत कुछ लिखा है। जैसे किस सप्ताह में क्या खाना है क्या नहीं। किस तिथि को क्या खाना चाहिए अथवा क्या नहीं। किस महीने में क्या भोजन सही है और क्या नहीं। दरअसल, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। प्रत्येक सप्ताह, तिथि या महीने में मौसम में बदलाव होता है। इस बदलाव को समझकर ही खाना जरूरी है।


*किस माह में क्या खाएं?*

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जिस तरह पूर्वजों को बताया गया है कि चैत चना, बैसाखे बेल, जैठे शयन, आषाढ़े खेल, सावन हर्रे, भादो तिल। कुवार मास गुड़ सेवै नित, कार्तिक मूल, अगहन तेल, पूस करे दूध से मेल। माघ मास घी-खिचड़ी खाय, फागुन उठ नित प्रात नहाय। इस तरह खानें के नियम बताए गए है।


हिन्दू माह बताते हैं मौसम में बदलाव

उल्लेखनीय है कि हिन्दू माह ही मौसम के बदलाव को प्रदर्शित करते हैं अंग्रेजी माह नहीं। अक्सर हम आप जब रात में दही की डिमांड घर में करते है तो माताएं देने से मना कर देती है। न मानने पर डांट का भी सामना करना पड़ता है। इसीलिए रात को दही नहीं खाना चाहिए। वहीं देखते है अज्ञान आदमी भी दूध के साथ नमक नहीं खाता है। क्योंकि उसको भी मालुम है कि दूध के साथ नमक नहीं शक्कर मिलाकर खाना चाहिए।


*ऐसे समझे किस माह में क्या न खाएं?*


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- *चैत्र माह: चैत्र माह में गुड़ खाना मना है। चना खा सकते हैं।*


- *वैशाख: तेल व तली-भुनी चीजों से परहेज करना चाहिए। बेल खा सकते हैं।*


- *ज्येष्ठ: इस माह भी बेल खाना मना है। इन महीनों में गर्मीं का प्रकोप रहता है अत: ज्यादा घूमना-फिरना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। अधिक से अधिक शयन करना चाहिए।*


*आषाढ़: आषाढ़ में पका बेल न खाना मना है। इस माह में हरी सब्जियों के सेवन से भी बचें। लेकिन इस माह में खूब खेल खेलना चाहिए। कसरत करना चाहिए।*


- *श्रावण: सावन माह में साग खाना मना है। साग अर्थात हरी पत्तेदार सब्जियां और दूध व दूध से बनी चीजों को भी खाने से मना किया गया है। इस माह में हर्रे खाना चाहिए जिसे हरिद्रा या हरडा कहते हैं।*


- *भाद्रपद: भादो माह में दही खाना मना है। इन दो महीनों में छाछ, दही और इससे बनी चीजें नहीं खाना चाहिए। भादो में तिल का उपयोग करना चाहिए।*


- *आश्विन: क्वार माह में करेला खाना मना है। इस माह में नित्य गुड़ खाना चाहिए।*


- *कार्तिक: कार्तिक माह में बैंगन, दही और जीरा बिल्कुल भी नहीं खाना मना है। इस माह में मूली खाना चाहिए।*


- *मार्गशीर्ष: अगहन में भोजन में जीरे का उपयोग नहीं करना चाहिए। तेल का उपयोग कर सकते हैं।*


- *पौष: पूस मास में दूध पी सकते हैं लेकिन धनिया नहीं खाना चाहिए क्योंकि धनिए की प्रवृति ठंडी मानी गई है और सामान्यत: इस मौसम में बहुत ठंड होती है। इस मौसम में दूध पीना चाहिए।*


- माघ: माघ माह में मूली और धनिया खाना मना है। मिश्री नहीं खाना चाहिए। इस माह में घी-खिचड़ी खाना चाहिए।*


- *फाल्गुन: फागुन माह में सुबह जल्दी उठना चाहिए। इस माह में में चना खाना मना।*

सोमवार, 6 अक्टूबर 2025

🌕 शरद पूर्णिमा 2025: धन, सुख और सौभाग्य के लिए प्रभावी उपाय व टोटके

🌕 शरद पूर्णिमा 2025: धन, सुख और सौभाग्य के लिए प्रभावी उपाय व टोटके
शरद पूर्णिमा हिन्दू पंचांग की अत्यंत शुभ रात मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा पूर्ण तेजस के साथ आकाश में उदित होता है और उसकी चाँदनी में दिव्यता का अद्भुत संगम होता है। शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की रात्रि मानी जाती है और इस दिन किए गए उपाय शीघ्र फलदायी होते हैं।
यह दिन धन प्राप्ति, स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।
🌼 शरद पूर्णिमा के प्रभावी उपाय और टोटके
1. लक्ष्मी पूजन और पीपल वृक्ष की आराधना
सुबह-सुबह स्नान करके पीपल के पेड़ के नीचे माता लक्ष्मी का पूजन करें और उन्हें घर में निवास के लिए आमंत्रित करें। इससे लक्ष्मी कृपा घर में बनी रहती है।
2. भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा
रात में भगवान विष्णु के साथ महालक्ष्मी की पूजा करें। यदि ब्राह्मण के माध्यम से पूजा कराई जाए तो इसका प्रभाव अधिक होता है।
3. चंद्रमा को दूध-चावल से अर्घ्य दें
चंद्र उदय के बाद कच्चे दूध, चावल और चीनी के मिश्रण से चंद्रमा को अर्घ्य दें। मंत्र जप करें – “ओम स्त्रां स्त्रीं स्त्रों सः चंद्रमसे नमः।” यह उपाय धन संबंधी बाधाओं को दूर करता है।
4. साबूदाने की खीर का भोग
माँ लक्ष्मी को साबूदाने की खीर में मिश्री डालकर भोग लगाएं और प्रसाद रूप में बांटें। यह उपाय धन आगमन के मार्ग खोलता है।
5. कौड़ियों का उपाय
11 कौड़ियों पर हल्दी से तिलक करें और उन्हें लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। हर पूर्णिमा पर इन कौड़ियों को दुबारा पूजें। इससे घर में धन वृद्धि होती है।
6. हनुमान मंदिर में दीपदान
चमेली तेल का दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। यह मनोबल बढ़ाता है और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा करता है।
7. दांपत्य जीवन में सौहार्द के नियम
पूर्णिमा और अमावस्या के दिन शारीरिक संबंध बनाने से बचें। यह वैवाहिक सुख को स्थायी बनाता है।
8. चंद्र दर्शन और त्राटक विधि
चंद्रमा को लगातार 15 मिनट देखने से आंखों की ज्योति बढ़ती है और एकाग्रता प्राप्त होती है।
9. आम पत्तों का तोरण
घर के मुख्य दरवाजे पर आम के पत्तों से तोरण बांधने से शुभ ऊर्जा आती है।
10. खीर दान से मानसिक शांति
पूर्णिमा के दिन स्वयं के हाथों से बनी खीर गरीबों को खिलाएं, इससे मानसिक तनाव कम होता है।
11. शिवलिंग अभिषेक
शहद, दूध, बेलपत्र और चंदन से शिवलिंग का अभिषेक करें। यह परिवार से कलह और दरिद्रता को दूर करता है।
12. सात्विक आहार और संयम
इस दिन जुआ, शराब या क्रोध से परहेज करें। बुजुर्गों और महिलाओं से मधुर व्यवहार रखें।
13. गर्भवती महिलाओं के लिए लाभदायक चाँदनी
पूर्णिमा की चाँदनी गर्भ पुष्ट करती है। गर्भवती महिला कुछ समय के लिए चाँदनी में अवश्य बैठें।
14. घर के दरवाजे पर शुभ चिन्ह बनाएं
हल्दी के जल से “ॐ” और “स्वस्तिक” प्रतीक बनाना शुभता का प्रतीक है।
15. शिवलिंग के पास दीपक जलाना
रात में मंदिर में दीपक जलाएं और “ॐ रुद्राय नमः” मंत्र का जप करें। इससे दुःख और बाधाएँ दूर होती हैं।

पितृपक्ष में परान्न से बचें

 गरुड़ पुराणोक्त पितृपक्ष परान्न निषेध कथा सनातन धर्म में 16 दिनों का पितृपक्ष वर्ष का सबसे सूक्ष्म और संवेदनशील समय माना गया है। गरुड़ पुरा...