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शिव तांडव स्तोत्र अर्थ सहित

रावण द्वारा रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से होती है हर प्रकार की सिद्धि…… शिव तांडव स्‍त्रोत भावार्थ सहित,, मंत्र व स्तोत्र में बड़ी शक्ति होती है | स्तोत्र में अभीष्ट आराध्य की विशेष रूप में स्तुति होती है जो मानव के लिए शुभ फलप्रद मानी जाती है | प्रत्येक देवी देवताओं के विभिन्न मंत्र व स्तोत्र वेदों व पुराणों में उल्लेखित हैं। ऐसा ही एक स्तोत्र है शिवतांडव स्तोत्र जिसके माध्यम से आप न केवल धन सम्पति पा सकते हैं बल्कि जीवन में आने वाली समस्त बाधाओं को दूर भी किया जा सकता है।शिवतांडव स्तोत्र लंकाधिपति रावण द्वारा रचा गया है, इसकी कठिन शब्दावली और अद्वितीय काव्य रचना इसे अन्य स्तोत्रों से अलग बनाती है | मान्यता है की रावण ने कैलाश पर्वत ही उठा लिया था और जब पूरे पर्वत को ही लंका ले चलने को हठी हुआ तो भगवान शिव ने अपने अंगूठे से तनिक सा दबाया तो कैलाश पर्वत पुन: वही अवस्थित हो गया। जिससे शिव के अनन्य भक्त रावण का हाथ दब गया और वह पीड़ित हो उठा और भगवान शंकर से क्षमा करें क्षमा करें बोल स्तुति करने लग गया जो कालांतर में शिवतांडव स्तोत्र के नाम से प्रसिद्ध हुई | जिसमें 17 श...