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समस्त पापों के नाश हेतु श्री रुद्र द्वादश नाम स्तोत्र

 * श्रीरुद्रद्वादशनामस्तोत्रं * 〰️〰️〰️🌸🕉️🌸〰️〰️〰️ प्रथमं तु महादेवं द्वितीयं तु महेश्वरं । तृतीयं शङ्करं प्रोक्तं चतुर्थं वृषभध्वजम् ॥ १॥ पञ्चमं कृत्तिवासं च षष्ठं कामाङ्गनाशनं । सप्तमं देवदेवेशं श्रीकण्ठं चाष्टमं तथा ॥ २॥ नवमं तु हरं देवं दशमं पार्वतीपतिं । रुद्रमेकादशं प्रोक्तं द्वादशं शिवमुच्यते ॥ ३॥ एतद्वादशनामानि त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः । गोघ्नश्चैव कृतघ्नश्च भ्रूणहा गुरुतल्पगः ॥ ४॥ स्त्रीबालघातकश्चैव सुरापो वृषलीपतिः । सर्वं नाशयते पापं शिवलोकं स गच्छति ॥ ५॥ शुद्धस्फटिकसङ्काशं त्रिनेत्रं चन्द्रशेखरं । इन्दुमण्डलमध्यस्थं वन्दे देवं सदाशिवम् ॥ ६॥ ॥श्रीरुद्रद्वादशनामस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥ 〰️〰️〰️🌸🕉️🌸〰️〰️〰️

पांच जगह बोला गया असत्य पाप नहीं होता है॥

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 *न नर्मयुक्तं वचनं हिनस्ति,* *न स्त्रीषु राजन्न विवाहकाले।* *प्राणात्यये सर्वधनापहारे,* *पंचानृतान्याहुरपातकानि।।* *(महाभारत, आदि प. - ८२/१६)* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 *अर्थात 👉 हे राजन्! परिहासयुक्त वचन असत्य होने पर भी हानिकारक नहीं होता, स्त्री के प्रति, विवाह के समय, प्राण-संकट के समय तथा सर्वस्व का अपहरण होते समय विवश होकर असत्य भाषण करना पड़े तो वह दोषकारक नही होता, ये पाँच प्रकार के असत्य पापशून्य कहे गए हैं।* 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

जाने -अनजाने में किये हुये पाप का प्रायश्चित कैसे कर सकते हैं?

  जाने -अनजाने में किये हुये पाप का प्रायश्चित कैसे कर सकते हैं? हम सभी से जाने - अनजाने में बहुत पाप हो जाते है जिसके बारे में कभी कभी हमे पता भी नहीं चलता के हमसे क्या पाप हो गया है। तो हम किस प्रकार उस पाप का प्रायश्चित कर सकते है । बहुत सुन्दर प्रश्न है ,यदि हमसे अनजाने में कोई पाप हो जाए तो क्या उस पाप से मुक्ती का कोई उपाय है। श्रीमद्भागवत जी के षष्ठम स्कन्ध में , महाराज परीक्षित जी ,श्री शुकदेव जी से ऐसा प्रश्न कर लिए। बोले भगवन - आपने पञ्चम स्कन्ध में जो नरको का वर्णन किया ,उसको सुनकर तो गुरुवर रोंगटे खड़े जाते हैं। प्रभूवर मैं आपसे ये पूछ रहा हूँ की यदि कुछ पाप हमसे अनजाने में हो जाते हैं ,जैसे चींटी मर गयी,हम लोग स्वास लेते हैं तो कितने जीव श्वासों के माध्यम से मर जाते हैं। भोजन बनाते समय लकड़ी जलाते हैं ,उस लकड़ी में भी कितने जीव मर जाते हैं । और ऐसे कई पाप हैं जो अनजाने हो जाते हैं । तो उस पाप से मुक्ती का क्या उपाय है भगवन । आचार्य शुकदेव जी ने कहा राजन ऐसे पाप से मुक्ती के लिए रोज प्रतिदिन पाँच प्रकार के यज्ञ करने चाहिए । -महाराज परीक्षित जी ने कहा, भगवन एक यज्ञ यदि कभी ...