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शनि देव

राजा को भी क्षण में रंक कर देने वाले शनिदेव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी!!!!!!! ▪️शनिदेव सूर्यदेव और छाया के पुत्र हैं । सूर्य समस्त ग्रहों के राजाहैं तो उनके पुत्र युवराज शनिदेव न्यायाधीश हैं । ▪️शनिदेव का जन्म ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को हुआ था इसीलिए शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या (शनिचरी अमावस्या) शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए बहुत शुभ मानी जाती है । ▪️शनिका रंग काला, अवस्था वृद्ध, आकृति दीर्घ, लिंग नपुंसक है । ▪️शनि के चार हाथों में बाण, वर, शूल और धनुष है । उनका वाहनगिद्ध है । ▪️शनि का गोत्र कश्यप व जाति शूद्र है ।  ▪️वे सौराष्ट्र के अधिपति हैं । ▪️शनिदेव को मन्द, शनैश्चर, सूर्यसूनु, सूर्यज, अर्कपुत्र, नील, भास्करी, असित, पंगु, क्रूरलोचन, छायात्मज आदि नामों से जाना जाता है । शनिदेवका वार शनिवार, धातु लोहा, रत्न नीलम, उपरत्नजमुनिया या लाजावर्त, जड़ी बिछुआ, बिच्छोलमूल (हत्था जोड़ी)  व समिधा शमी  है ।  ▪️शनि का आधिपत्य मकर और कुम्भ राशि तथा पुष्य, अनुराधा एवं उत्तराभाद्रपद नक्षत्र पर है ।  ▪️शनि वायुतत्त्व प्रधान ग्रह है । ▪️अंकज्योतिष के अनुसार प्रत्येक महीने...

शनि स्तोत्र

*दशरथ कृत शनि स्तोत्र* 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।१।।     नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च ।     नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।२।। नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ  वै नम:। नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।३।।     नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम: ।     नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।४।। नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते। सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च ।।५।।     अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते ।     नमो मन्दगते तुभ्यं निरिाणाय नमोऽस्तुते ।।६।। तपसा दग्धदेहाय नित्यं  योगरताय च । नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम: ।।७।।     ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज  सूनवे ।     तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात् ।।८।। देवासुरमनुष्याश्च  सिद्घविद्याधरोरगा: । त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।९।।     प्रसाद कुरु  मे  देव...