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रंभा- शुक संवाद

रंभा - श्री शुकदेव जी संवाद !!!!!!! ----------------------- रंभा नामक एक अतीव सुंदरी (अप्सरा) श्री शुकदेव जी के रूपलावणय को देख मुग्ध हो गयी और श्रीशुकदेव जी को लुभाने पहुंची। श्री शुकदेव जी सहज विरागी थे। बचपन में ही वह वन चले गए थे। उन्होंने ही राजा परीक्षित को भागवत पुराण सुनाया था। वे महर्षि वेदव्यास के अयोनिज पुत्र थे और बारह वर्षों तक माता के गर्भ में रहे। श्रीकृष्ण के यह आश्वासन देने पर कि उन पर माया का प्रभाव नहीं पड़ेगा, उन्होंने जन्म लिया। उन्हें गर्भ में ही उन्हें वेद, उपनिषद, दर्शन और पुराण आदि का ज्ञान हो गया था। कम अवस्था में ही वह ब्रह्मलीन हो गए थे। रंभा ने उन्हें देखा, तो वह मुग्ध हो गई और उनसे प्रणय निवेदन किया। शुकदेव ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया। रंभा उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित करने में जुट गई। जब वह बहुत कोशिश कर चुकी, तो शुकदेव ने पूछा, देवी, आप मेरा ध्यान क्यों आकर्षित कर रही हैं। रंभा ने कहा, ताकि हम जीवन का छक कर भोग कर सकें। शुकदेव बोले, देवी, मैं तो उस सार्थक रस को पा चुका हूं, जिससे क्षण भर हटने से जीवन निरर्थक होने लगता है। मैं उस रस को छोड़कर जीवन ...