॥ अथ श्री रुद्रकवचम् ॥ मनुष्य के बुरे कर्मों का फल रुद्र, यम, वरुण और नैऋति के माध्यम से मिलता है यदि जीवन में कष्ट अधिक हो तो महादेव से उदार / आशुतोष कौन हो सकता है? अतः इनका आश्रय परम् कल्याणकारक है। इसी श्रृंखला में "श्रीरूद्रकवच" प्रकाशित कर रहे हैं। विधिवत शिवलिंग पूजन करके रविवार या सोमवार या त्रयोदशी से आरम्भ करके नित्य 31 पाठ करते हुए 41 दिन में 1200 पाठ पूरे करें। किसी भी तरह के कष्ट में शांति अवश्य प्राप्त होगी। आगे इनके 11000 तक पाठ पूरा करनें का प्रयत्न करें, सब दुख दूर होंगे ; बशर्ते आप सदाचार का कड़ाई से पालन करें। प्याज, लहसुन, मछली, मद्य, मांस, अंडा, तम्बाकू सेवन पूर्णतः निषिद्ध है। 🔱🕉️🔱🕉️🔱🕉️🔱🕉️🔱🕉️🔱🕉️ ॐ अस्य श्री रुद्र कवच स्तोत्र महा मंत्रस्य दूर्वासऋषिः अनुष्ठुप् छंदः त्र्यंबक रुद्रो देवता ह्राम् बीजम् श्रीम् शक्तिः ह्रीम् कीलकम् मम मनसोभीष्टसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः ह्रामित्यादिषड्बीजैः षडंगन्यासः ॥ ॥ ध्यानम् ॥ शांतम् पद्मासनस्थम् शशिधरमकुटम् पंचवक्त्रम् त्रिनेत्रम् शूलम् वज्रंच खड्गम् परशुमभयदम् दक्षभागे महन्तम...
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