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यज्ञादि में त्याज्य पदार्थ

 🔥 यज्ञादि में त्याज्य पदार्थ 🔥 यज्ञ कर्म में भावदुष्ट  - क्रियादुष्ट  - कालदुष्ट  - संसर्गदुष्ट  तथा जातिदुष्ट -- इन पदार्थों का त्याग करना चाहिए । १-- भावदुष्ट :--        " रूपतो गन्धतो वापि यच्चाभक्ष्यैः समं भवेत् ।          भावदुष्टं   च    तत्प्रोक्तं    मुनिभिर्धर्मपारगैः ।। " जो पदार्थ रूप से अथवा गंध से भी अभक्ष्य पदार्थों के सदृश हो - उसे धर्म के पारङ्गत मुनियों ने " भावदुष्ट " कहा है । २-- क्रियादुष्ट :--         " आरनालं  च   मद्यं  च   करनिर्मथितं  दधि ।            हस्तदत्तं  च  लवणं   क्षीरं  घृतपयांसि  च ।।            हस्तेनोद्धृत्य तोयं च  पीतं वक्त्रेण वैकदा ।             शब्देन पीतं भुक्तं च गव्यं ताम्रेण संयुक्तम् ।।            क्षीरं च  लवणोन्मिश्रं...