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संदेश

भगवान शिव

* भगवान शिव हम सभी के ईष्ट हैं। वे सभी की पीड़ा, दर्द को समझते हैं। * शिव के सिर पर गंगा है, उनके सिर पर चंद्रमा विराजते हैं, उन्हें 'चंन्द्रमौलि' कहते हैं। * शिव की आराधना, साधना, उपासना से मनुष्य अपने पापों एवं संतापों से इसी जन्म में मुक्ति पा सकता है। * सोमवार चंद्रवार है, इसीलिए चंद्रमा को तृप्त करने के लिए कावरिए अपनी कावरों में घंटियां बांधे हुए 'हर बम' 'हर हर महादेव', 'बम बोले बम' 'ॐ नम: शिवाय' आदि कहते हुए शिवधाम जाते हैं। * भगवान शिव मात्र एक लोटा जल, बेलपत्र, मंत्र जप से ही प्रसन्न हो जाते है। अत: मनुष्य अगर शिव का इतना भी पूजन कर लें तो पाप कर्मों से सहज मुक्ति प्राप्त हो जाती है। भगवान शिव के ग्यारह रुद्र रूप ~ शास्त्रों के मुताबिक शिव ग्यारह अलग-अलग रुद्र रूपों में दु:खों का नाश करते हैं। यह ग्यारह रूप एकादश रुद्र के नाम से जाने जाते हैं। लगभग सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फल देने वाले हैं। भगवान शिव के अनगिनत रूप हैं, क्योंकि सारी...

श्रीमान माधव गौड़ेश्वर वैष्णव परम्पारा: -

श्रीमान माधव गौड़ेश्वर वैष्णव परम्पारा: - 1. भगवान श्रीमानारायण 2. भगवान ब्रह्मा 3. देवारसी नारद 4. कृष्ण-दुवेयना अर्थात् वेद-व्यास 5. जगदगुगु श्री माधवचर्य 6. श्री नरहरी 7. श्री माधव 8. श्री अशोक 9. श्री जयथार्थ 10. श्री ज्ञानसिंघु 11. श्री दयानिधि 12. श्री विद्यानधी 13. श्री राजेन्द्र 14. श्री जयधर्म 15. श्री प्रशुतोम 16. श्री ब्रह्मांण्य 17. श्री व्यास-तीर्थ 18. श्री लक्ष्मी पाटी 19. श्री माधेंद्र पुरी 20. श्री ईश्वर पुरी 21. श्री चिंतन महाप्रभु 22. श्री गोपाल भट्टा गोस्वामी 23. श्री दामोदर दास गोस्वामी 24. श्री मथुरा नाथ गोस्वामी 25. श्री विष्णु दास गोस्वामी 26. श्री मेघश्याम गोस्वामी 27. श्री रघुनाथ दास गोस्वामी 28. श्री देवकी नंदन गोस्वामी 29. श्री राधा लाल गोस्वामी 30. श्री गिरधरलाल गोस्वामी 31. श्री गुलब्लाल गोस्वामी 32. श्री मुरलीधर गोस्वामी 33. श्री प्रीतम लाल गोस्वामी 34. श्री मनीलाल गोस्वामी 35. श्री विजय कृष्ण गोस्वामी 36. श्री अतुल कृष्ण गोस्वामी 37. श्री श्रीधर कृष्ण गोस्वामी 38. श्री पुंड्रिक क...

शास्त्रों में कुछ नियम और मर्यादाये

शास्त्रों में कुछ नियम और मर्यादाये कही गई है जिनका यदि हम थोडा भी पालन करे तो जीवन में आने वाली छोटी-छोटी परेशानियो से हम बच सकते है तो आईये जाने ये बाते - 1. -जिसका कुल और स्वभाव नहीं जाना है, उसको घर में कभी न ठहराना चाहिए. 2. -लोभी जिस धन को धरती में अधिक नीचे गाड़ता है, वह धन पाताल में जाने के लिए पहले से ही मार्ग कर लेता है.और जो मनुष्य अपने सुख को रोक कर धनसंचय करने की इच्छा करता है, वह दूसरों के लिए बोझ ढ़ोने वाले मजदूर के समान क्लेश ही भोगने वाला है. 3. अनुपयोगी धन की गति -जो मनुष्य धन को देवता के, ब्राह्मण के तथा भाई बंधु के काम में नहीं लाता है, उस कृपण का धन तो जल जाता है,या चोर चुरा ले जाते हैं, अथवा राजा छीन लेता है.संचय नित्य करना चाहिये, पर अति संचय करना योग्य नहीं है. 4. ये चार बातें दुनिया में दुर्लभ -प्रिय वाणी के सहित दान, अहंकाररहित ज्ञान, क्षमायुक्त शूरता, और दानयुक्त धन, हैं. 5. जहाँ ये चार न हो -ॠण देने वाला, वैद्य, वेदपाठी और सुंदर जल से भरी नदी, ये चारों न हो, वहाँ नहीं रहना चाहिए. 6. इनके साथ मेल न करे -यह कहा है कि वैरी चाहे जितना मीठा बन कर मेल करे, ...

तुलसी स्तोत्रम् (Tulsi Strotram in Hindi)

जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे। यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः ॥1॥ नमस्तुलसि कल्याणि नमो विष्णुप्रिये शुभे। नमो मोक्षप्रदे देवि नमः सम्पत्प्रदायिके ॥2॥ तुलसी पातु मां नित्यं सर्वापद्भ्योऽपि सर्वदा । कीर्तितापि स्मृता वापि पवित्रयति मानवम् ॥3॥ नमामि शिरसा देवीं तुलसीं विलसत्तनुम् । यां दृष्ट्वा पापिनो मर्त्या मुच्यन्ते सर्वकिल्बिषात् ॥4॥ तुलस्या रक्षितं सर्वं जगदेतच्चराचरम् । या विनिहन्ति पापानि दृष्ट्वा वा पापिभिर्नरैः ॥5॥ नमस्तुलस्यतितरां यस्यै बद्ध्वाजलिं कलौ । कलयन्ति सुखं सर्वं स्त्रियो वैश्यास्तथाऽपरे ॥6॥ तुलस्या नापरं किञ्चिद् दैवतं जगतीतले । यथा पवित्रितो लोको विष्णुसङ्गेन वैष्णवः ॥7॥ तुलस्याः पल्लवं विष्णोः शिरस्यारोपितं कलौ । आरोपयति सर्वाणि श्रेयांसि वरमस्तके ॥8॥ तुलस्यां सकला देवा वसन्ति सततं यतः । अतस्तामर्चयेल्लोके सर्वान् देवान् समर्चयन् ॥9॥ नमस्तुलसि सर्वज्ञे पुरुषोत्तमवल्लभे । पाहि मां सर्वपापेभ्यः सर्वसम्पत्प्रदायिके ॥10॥ इति स्तोत्रं पुरा गीतं पुण्डरीकेण धीमता । विष्णुमर्चयता नित्यं शोभनैस्तुलसीदलैः ॥11॥ तुलस...

श्री लक्ष्मी नारायण

श्री विष्णु : हिन्दू धर्म के अनुसार विष्णु 'परमेश्वर' के तीन मुख्य रूपों में से एक रूप हैं। भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं । संपूर्ण विश्व श्रीविष्णु की शक्ति से ही संचालित है। वे निर्गुण, निराकार तथा सगुण साकार सभी रूपों में व्याप्त हैं। पद्मानने पद्मविपद्मपत्रे पद्मप्रिये पद्मदलायताक्षि | विश्वप्रिये विष्णुमनोऽनुकूले त्वत्पादपद्मं मयि सन्निधत्स्व || अर्थ: पद्मके (कमल पुष्प ) समान मुखवाले, बिना पत्र एवं विघ्नवाले पद्म समान, पद्मप्रिय, पद्म समान नयन वाले,विश्वप्रिय – हे मनको भानेवाले श्री विष्णु अपने पद्म रूपी चरणोंके सान्निध्यमें हमें रखें !; माँ लक्ष्मि ! ======= नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते । शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥१॥ नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि । सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥२॥ सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयंकरि । सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥३॥ सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि । मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥४॥ आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि । योगजे योगसम्भूते ...

हमारे सात चक्र

1. मूलाधार चक्र : यह शरीर का पहला चक्र है। गुदा और लिंग के बीच चार पंखुरियों वाला यह "आधार चक्र" है। 99.9% लोगों की चेतना इसी चक्र पर अटकी रहती है और वे इसी चक्र में रहकर मर जाते हैं। जिनके जीवन में भोग, संभोग और निद्रा की प्रधानता है, उनकी ऊर्जा इसी चक्र के आसपास एकत्रित रहती है। मंत्र : "लं" कैसे जाग्रत करें : मनुष्य तब तक पशुवत है, जब तक कि वह इस चक्र में जी रहा है.! इसीलिए भोग, निद्रा और संभोग पर संयम रखते हुए इस चक्र पर लगातार ध्यािन लगाने से यह चक्र जाग्रत होने लगता है। इसको जाग्रत करने का दूसरा नियम है यम और नियम का पालन करते हुए साक्षी भाव में रहना। प्रभाव : इस चक्र के जाग्रत होने पर व्यक्ति के भीतरवीरता, निर्भीकता और आनंद का भाव जाग्रत हो जाता है। सिद्धियां प्राप्त करने के लिए वीरता, निर्भीकता और जागरूकता का होना जरूरी है। 2. स्वाधिष्ठान चक्र - यह वह चक्र लिंग मूल से चार अंगुल ऊपर स्थित है, जिसकी छ: पंखुरियां हैं। अगर आपकी ऊर्जा इस चक्र पर ही एकत्रित है, वह आपके जीवन में आमोद-प्रमोद, मनोरंजन, घूमना-फिरना और मौज-मस्ती करने की प्रधानता रहेगी। य...

चुकंदर के स्वास्थ्य लाभ

चुकंदर एक ऐसी सब्जी है जिसे बहुत से लोग नापसंद करते हैं. इसके रस को पीने से न केवल शरीर में रक्त में हीमोग्लोबिन की मात्रा बढ़ती है बल्कि कई अन्य स्वास्थ्य लाभ भी होते हैं. यदि आप इस सब्जी से नफरत करते हैं तो जरा एक बार इसके फायदों के बारे में जरूर पढ़ लें. शायद कम लोग ही जानते हैं कि चुकंदर में लौह तत्व की मात्रा अधिक नहीं होती है, किंतु इससे प्राप्त होने वाला लौह तत्व उच्च गुणवत्ता का होता है, जो रक्त निर्माण के लिए विशेष महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि चुकंदर का सेवन शरीर से अनेक हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने में बेहद लाभदायी है। ऐसा समझा जाता है कि चुकंदर का गहरा लाल रंग इसमें लौह तत्व की प्रचुरता के कारण है, बल्कि सच यह है कि चुकंदर का गहरा लाल रंग इसमें पाए जाने वाले एक रंगकण (बीटा सायनिन) के कारण होता है। एंटी ऑक्सीडेंट गुणों के कारण ये रंगकण स्वास्थ्य के लिए अच्छे माने जाते हैं। एनर्जी बढ़ाये : यदि आपको आलस महसूस हो रही हो या फिर थकान लगे तो चुकंदर का जूस पी लीजिये. इसमें कार्बोहाइड्रेट होता है जो शरीर यह पानी फोड़े, जलन और मुहांसों के लिए काफी उपयोगी होता है. खसरा और बुखा...