रविवार, 6 मार्च 2022

पांच जगह बोला गया असत्य पाप नहीं होता है॥

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩


*न नर्मयुक्तं वचनं हिनस्ति,*

*न स्त्रीषु राजन्न विवाहकाले।*

*प्राणात्यये सर्वधनापहारे,*

*पंचानृतान्याहुरपातकानि।।*

*(महाभारत, आदि प. - ८२/१६)*

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩

*अर्थात 👉 हे राजन्! परिहासयुक्त वचन असत्य होने पर भी हानिकारक नहीं होता, स्त्री के प्रति, विवाह के समय, प्राण-संकट के समय तथा सर्वस्व का अपहरण होते समय विवश होकर असत्य भाषण करना पड़े तो वह दोषकारक नही होता, ये पाँच प्रकार के असत्य पापशून्य कहे गए हैं।*

🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

If u have any query let me know.

पितृपक्ष में परान्न से बचें

 गरुड़ पुराणोक्त पितृपक्ष परान्न निषेध कथा सनातन धर्म में 16 दिनों का पितृपक्ष वर्ष का सबसे सूक्ष्म और संवेदनशील समय माना गया है। गरुड़ पुरा...