🔥 अग्नि में आहूति किस स्थान में डालें 🔥
" सर्वकार्यप्रसिद्धयर्थं जिह्वायां तत्र होमयेत् ।
चक्षुः कर्णादिकं ज्ञात्वा होमयेद्देशिकोत्तमः ।।
अग्निकर्णे हुतं यस्तु कुर्याच्चेद् व्याधितो भयम् ।
नासिकायां महद्दुःखं चक्षुषोर्नाशनं भवेत् ।।
केशे दारिद्रयदं प्रोक्तं तस्माज्जिह्वासु होमयेत् ।
यत्र काष्ठं तत्र श्रोते यत्र धूमस्तु नासिके ।।
यत्राल्पज्वलनं नेत्रं यत्र भस्म तु तच्छिरः ।
यत्र न ज्वलितो वह्निस्तत्र जिह्वा प्रकीर्तिता ।। "
☛ समस्त कार्यों की सिद्धि के लिए अग्नि की जिह्वा में होम करना चाहिए -- श्रेष्ठ आचार्य चक्षु - कर्ण - नासिका - सिर आदि की पहचान कर हवन करें ---
अग्नि के कान में यदि हवन करें तो उसे व्याधि से भय होता है -- नासिका में हवन करें तो महादुःख होता है -- नेत्रों में हवन करें तो विनाश होता है -- केशों में किया गया हवन दारिद्र्यप्रद कहा गया है -- इसलिए जिह्वाओं में हवन करना चाहिए ---
जहाँ काष्ठ है वहाँ अग्नि के कान कहे गये हैं --
जहाँ धुआं है वहाँ अग्नि की नासिका कही गई है -- जहाँ अग्नि कम जलती है वहाँ अग्नि के नेत्र कहे गये हैं -- जहाँ भस्म है वहाँ अग्नि का सिर कहा गया है -- और जहाँ अग्नि ज्वालायुक्त है वहाँ अग्नि की जिह्वा कही गई है - अतः जिह्वा में ही हवन श्रेष्ठ कहा गया है ।
🚩 हर हर महादेव 🚩 ।।वशिष्ठ ।।
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