मंगलवार, 1 सितंबर 2026

अयोग्य द्वारा स्थापित मूर्ति से नुक़सान

 🔥 शूद्र और स्त्री के द्वारा स्थापित मूर्तियों को प्रणाम करने से

                             हानि 🔥


" यः शूद्रेणार्चितं लिङ्गं विष्णुं वा प्रणमेन्नरः। 

  न तस्य निष्कृतिर्दष्टा प्रायश्चित्तायुतेरपि ।।

  नमेद्यः शूद्रसंस्पृष्टं लिङ्गं वा हरिमेव वा ।

  स सर्वयातनाभोगी यावदाचन्द्रतारकम् ।।

                   पाखण्डपूजितं लिङ्गं नत्वा पाखण्डतां व्रजेत् ।

                   आभीरपूजितं लिङ्गं नत्वा पाखण्डतां व्रजेत् ।।

                   योषिद्भिः पूजितं लिङ्गं विष्णुं वापि नमेत्तु यः ।

                   स कोटिकुलसंयुक्तमाकल्पं रौरवं वसेत् ।।

जो मनुष्य शूद्र से पूजित शिवलिंग और विष्णु को अभिवादन करता है - उसके पाप की निवृत्ति दस हजार बार प्रायश्चित करने से भी नहीं होती -- जो शूद्र के स्पर्श किये हुए लिङ्ग और हरि ( विष्णु ) की मूर्ति को अभिवादन करता है वह समस्त प्रकार की यातनाओं को तब तक भोगता है जब तक सूर्य और चंद्र की स्थिति रहती है ।

                    जो पाखण्डी से पूजित लिङ्ग को प्रणाम करता है वह पाखण्ड को प्राप्त करता है-- जो आभिर से ( ग्वाला से ) पूजित लिङ्ग को प्रणाम करता है- वह नर्क को प्राप्त होता है -- जो स्त्रियों से पूजित लिङ्ग और विष्णु को प्रणाम करता है - वह करोडों कुलों सहित कल्पपर्यन्त रौरव नरक निवास करता है ।

                                                                    ( नारदपुराण )


🌷 विष्णु और शिव की मूर्ति के स्पर्श से शूद्रादि की हानि 🌷


" शूद्रो वाऽनुपनीतो वा स्त्रियो वा पतितोऽपि वा ।

  केशवं वा शिवं वापि स्पृष्ट्वा नरकम्श्नुते ।। "

                 शूद्र - अनुपनीत - ( यज्ञोपवीत संस्कार से रहित ) - स्त्री और पतित -- ये विष्णु और शिव की मूर्ति को स्पर्श करके नरक को प्राप्त करते हैं ।


                  🚩 हर हर महादेव 🚩 ।।

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