ग्राह्य व अग्राह्य आसन
" काम्यार्थ कम्बलं चैव श्रेष्ठं च रक्तकम्बलम् ।
कृष्णाजिने ज्ञानसिद्धिर्मोक्ष श्री र्व्याघ्चर्म्मणि ।।
कुशासने मंत्रसिद्धिर्नात्रकार्य्या विचारणा ।। "
काम्य कर्म में कम्बल का आसन वह भी लाल हो श्रेष्ठ है -- काले मर्गचर्म ज्ञानसिद्धि प्राप्त होती है -- व्याघ्रचर्म पर मोक्षश्री प्राप्त होती है - कुशासन पर सब मंत्रों की सिद्धि प्राप्त होती है -- इसमें कुछ भी संदेह नहीं है ।
" धरण्यां दुःखसम्भूतिर्दौर्भाग्यं दारूजासने ।
वंशासने दरिद्रः स्यात् पाषाणो व्याधि पीडनम् ।।
तृणासने यशोहानिः पल्लवे चित्तविभ्रमः।
जपध्यानतपोहानिं वस्त्रासनं करोति हि ।। "
खाली भूमि पर निरासन यानि बिना आसन से बैठने से दुःख -- लकडी के आसन पर बैठने से दौर्भाग्य - बांस के आसन पर बैठने से दरिद्रता -- पत्थर पर बैठने से रोग -- घास - फूँस के आसन पर बैठने से अपयश -- पत्तों के आसन पर बैठने से चित्तभ्रम -- और कपडे के आसन पर बैठने जप - ध्यान और तप की हानि होती है ।
" आसीनासो अरूणीनामुपस्थे " ऊर्णा ( ऊन ) निर्मित आसन पर बैठने का भी निर्देश है ।
🚩 हर हर महादेव 🚩 ।।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
If u have any query let me know.