मंगलवार, 1 सितंबर 2026

आसन

  ग्राह्य व अग्राह्य आसन 


" काम्यार्थ  कम्बलं  चैव श्रेष्ठं  च  रक्तकम्बलम् ।

  कृष्णाजिने ज्ञानसिद्धिर्मोक्ष श्री र्व्याघ्चर्म्मणि ।।

  कुशासने    मंत्रसिद्धिर्नात्रकार्य्या   विचारणा ।। "

                काम्य कर्म में कम्बल का आसन वह भी लाल हो श्रेष्ठ है -- काले मर्गचर्म ज्ञानसिद्धि प्राप्त होती है -- व्याघ्रचर्म पर मोक्षश्री प्राप्त होती है - कुशासन पर सब मंत्रों की सिद्धि प्राप्त होती है -- इसमें कुछ भी संदेह नहीं है ।


" धरण्यां     दुःखसम्भूतिर्दौर्भाग्यं     दारूजासने ।

  वंशासने दरिद्रः स्यात् पाषाणो व्याधि पीडनम् ।।

  तृणासने    यशोहानिः     पल्लवे    चित्तविभ्रमः।

  जपध्यानतपोहानिं    वस्त्रासनं    करोति    हि ।। "

                  खाली भूमि पर निरासन यानि बिना आसन से बैठने से दुःख  -- लकडी के आसन पर बैठने से दौर्भाग्य  - बांस के आसन पर बैठने से दरिद्रता  -- पत्थर पर बैठने से रोग -- घास - फूँस के आसन पर बैठने से अपयश -- पत्तों के आसन पर बैठने से चित्तभ्रम -- और कपडे के आसन पर बैठने जप - ध्यान और तप की हानि होती है ।


" आसीनासो अरूणीनामुपस्थे " ऊर्णा ( ऊन ) निर्मित आसन पर बैठने का भी निर्देश है ।


                  🚩 हर हर महादेव 🚩 ।।

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