ईर्ष्या घृणी त्वसंतुष्टः क्रोधनो नित्यशंकितः । परभाग्योपजीवी च षडेते दुःखभागिनः ।।
भावार्थ : _*ईर्ष्या करने वाला, घृणा करने वाला, सदैव क्रोध करने वाला, सदा असन्तुष्ट रहने वाला, सदा शंका करने वाला तथा दूसरे के भरोसे जीनेवाला, ये छ: सदा दुःख भोगते हैं।*_👆👆👆👆👆
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