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संदेश

मूर्ति का त्याग

" असुरैर्मुनिभिर्गोत्रैस्तन्त्रविद्भिः        प्रतिष्ठितम् ।    जीर्णं वाऽप्यथवा भग्नं विधिनापि न चालयेत्।। "                   राक्षसों के द्वारा  - मुनियों के द्वारा - मुनियों के गोत्रजों के द्वारा और तन्त्रवेताओं के द्वारा प्रतिष्ठित मूर्ति यदि जीर्ण हो जाये अथवा खण्डित हो जाये तो उस मूर्ति को किसी भी रूप से हटाना उचित नहीं ।         ( अग्निपुराण १७३|१९ ) 🚩    शिवलिंग आदि मूर्तियों के जलने - टूटने और चलने पर ( स्थानभ्रष्ट होने पर  ) जीर्णोद्धार करना चाहिए  - किन्तु अनादिसिद्ध लिङ्ग आदि मूर्तियों के खण्डित होने पर उनका जीर्णोद्धार करना उचित नहीं है -- ऐसी मूर्तियों के लिए ' महाभिषेक ' करना चाहिए।                     ( निर्णयसिन्धु )                 🛕     देवमूर्ति के अंग में यदि दूसरा अंग अर्थात् दूसरे नेत्र चढाने हों - तो पुनः प्रतिष्ठा करनी चाहि...

आसन

  ग्राह्य व अग्राह्य आसन  " काम्यार्थ  कम्बलं  चैव श्रेष्ठं  च  रक्तकम्बलम् ।   कृष्णाजिने ज्ञानसिद्धिर्मोक्ष श्री र्व्याघ्चर्म्मणि ।।   कुशासने    मंत्रसिद्धिर्नात्रकार्य्या   विचारणा ।। "                 काम्य कर्म में कम्बल का आसन वह भी लाल हो श्रेष्ठ है -- काले मर्गचर्म ज्ञानसिद्धि प्राप्त होती है -- व्याघ्रचर्म पर मोक्षश्री प्राप्त होती है - कुशासन पर सब मंत्रों की सिद्धि प्राप्त होती है -- इसमें कुछ भी संदेह नहीं है । " धरण्यां     दुःखसम्भूतिर्दौर्भाग्यं     दारूजासने ।   वंशासने दरिद्रः स्यात् पाषाणो व्याधि पीडनम् ।।   तृणासने    यशोहानिः     पल्लवे    चित्तविभ्रमः।   जपध्यानतपोहानिं    वस्त्रासनं    करोति    हि ।। "                   खाली भूमि पर निरासन यानि बिना आसन से बैठने से दुःख  -- लकडी के आसन पर बैठने से दौर्भाग्य...

वसंत ऋतुचर्या: मार्च-अप्रैल में शरीर का 'नेचुरल डिटॉक्स' कैसे करें?

  वसंत ऋतुचर्या: मार्च-अप्रैल में शरीर का 'नेचुरल डिटॉक्स' कैसे करें? ​ऋतुचर्या का अर्थ है प्रकृति की लय के साथ तालमेल बिठाना। आयुर्वेद के अनुसार, जैसे मौसम बदलता है, वैसे ही हमारे शरीर के आंतरिक दोषों ( वात, पित्त और कफ ) का संतुलन भी बदलता है। मार्च और अप्रैल का समय 'ऋतु संधि' का काल होता है, जहाँ सर्दियों की विदाई और गर्मियों का आगमन होता है। इसी बदलाव के समय यदि हम अपनी जीवनशैली नहीं बदलते, तो बीमारियाँ हमें घेर लेती हैं। ​वसंत में क्यों बिगड़ती है सेहत? ​सर्दियों के दौरान हमारे शरीर में कफ जमा (संचय) होता है। जैसे ही वसंत की धूप तेज होती है, यह जमा हुआ कफ पिघलने लगता है, जिससे शरीर में 'कफ का प्रकोप' हो जाता है। यही कारण है कि इस मौसम में सुस्ती, भारीपन और एलर्जी जैसी समस्याएँ बढ़ जाती हैं। ​कफ बढ़ने के मुख्य संकेत: ​ पाचन की समस्या: भूख न लगना और खाया हुआ भोजन भारी महसूस होना। ​ श्वसन संबंधी रोग: बार-बार सर्दी-जुकाम, खांसी या अस्थमा का बढ़ना। ​ मानसिक स्थिति: जरूरत से ज्यादा नींद आना, आलस और काम में मन न लगना। ​ त्वचा: खुजली या छोटे-छोटे दानों ...

शकुन-अपशकुन

 शकुन-अपशकुन की मान्यता क्यों? 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ प्राचीन काल से ही भारत में शकुन द्वारा शुभाशुभ विचार करके यात्रा या किसी नवीन कार्य के आरम्भ करने की परंपरा रही है। प्रकृति से प्राप्त संकेत ही शकुन का आधार हैं। अच्छी या बुरी किसी भी महत्वपूर्ण घटना से पूर्व प्रकृति में कुछ विकार उत्पन्न होता है। हमारे ऋषि मुनियों ने इन प्राकृतिक विकारों का अपने अनुभव के आधार पर शुभाशुभ वर्गों में वर्गीकरण किया वास्तव में शकुन स्वयं न तो शुभ हैं न अशुभ , ये केवल इष्ट अथवा अनिष्ट के सूचक मात्र हैं। किसी महत्वपूर्ण कार्य को आरम्भ करते समय या उसके लिए यात्रा पर जाते समय शकुन पर विचार किया जाता है। शुभ शकुन होने पर कार्यसिद्धि तथा अशुभ शकुन होने पर कार्य की हानि का संकेत मिलता है। प्राचीन राजा –महाराजा भी अपने दरबार में विद्वान शकुनी को महत्वपूर्ण स्थान देते थे तथा प्रत्येक कार्य से पूर्व उसका परामर्श लेते थे। पुराणों में शकुन विचार 〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️ वेदों, स्मृतियों, पुराणादि धर्मशास्त्रों एवं फलित ज्योतिष शास्त्रों तथा धर्मसिन्धु में शुभ-अशुभ शकुनों के विषय में विस्तार से जानकारी दी गई है। शकुन हेतु...

स्वप्नसंकेत

  स्वप्नसंकेत --- ज्योतिष के अनुसार रात्रि नींद में दिखाई देने वाले हर स्वप्न का एक ख़ास संकेत एवं संभावित फल कितनी जल्दी मिलेगा, यह स्वप्न रात्रि के किस पहर में देखा गया है इस पर आधारित है सामान्यत: ब्राह्मवेला में देखे गए स्वप्न जल्दी फलीभूत होते हैं।       ~ रात्रि स्वप्न~ ~ फल~ 1- आंखों में काजल लगाना- शारीरिक कष्ट होना 2- स्वयं के कटे हाथ देखना- किसी निकट परिजन की मृत्यु 3- सूखा हुआ बगीचा देखना- कष्टों की प्राप्ति 4- मोटा बैल देखना- अनाज सस्ता होगा 5- पतला बैल देखना - अनाज महंगा होगा 6- भेडिय़ा देखना- दुश्मन से भय 7- राजनेता की मृत्यु देखना- देश में समस्या होना 8- पहाड़ हिलते हुए देखना- किसी बीमारी का प्रकोप होना 9- पूरी खाना- प्रसन्नता का समाचार मिलना 10- तांबा देखना- गुप्त रहस्य पता लगना 11- पलंग पर सोना- गौरव की प्राप्ति 12- थूक देखना- परेशानी में पडऩा 13- हरा-भरा जंगल देखना- प्रसन्नता मिलेगी 14- स्वयं को उड़ते हुए देखना- किसी मुसीबत से छुटकारा 15- छोटा जूता पहनना- किसी स्त्री से झगड़ा 16- स्त्री से मैथुन करना- धन की प्राप्ति 17- किसी से ...

किस महीने में क्या खाए और क्या नहीं खाए

 * आयुर्वेद के अनुसार किस महीने में क्या खाए और क्या नहीं खाए जिससे रहे निरोगी काया* मौसम के अनुकूल अगर आप भोजन करते है। या फिर खाना-पीना खाते है तो अक्सर आप बड़े-बुजुर्गों के मुख ये शब्द जरूर सुने होंगे। चौते गुड़, वैशाखे तेल, जेठ के पंथ, अषाढ़े बेल। सावन साग, भादो मही, कुवांर करेला, कार्तिक दही। अगहन जीरा, पूसै धना, माघै मिश्री, फाल्गुन चना। जो कोई इतने परिहरै, ता घर बैद पैर नहिं धरै। अर्थात इस दोहा के माध्यम से बताया गया है कि जो आदमी इन चीजों पर अमल करेगा यानी कि नहीं खाएगा। वह इंसान कभी बीमार नहीं होगा। चिकित्सक-वैद्य के पास नहीं जाना पड़ेगा। हिन्दू धर्मशास्त्र के जानकार आज भी कहते है कि आयुर्वेद में भोजन के संबंध में बहुत कुछ लिखा है। जैसे किस सप्ताह में क्या खाना है क्या नहीं। किस तिथि को क्या खाना चाहिए अथवा क्या नहीं। किस महीने में क्या भोजन सही है और क्या नहीं। दरअसल, इसके पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। प्रत्येक सप्ताह, तिथि या महीने में मौसम में बदलाव होता है। इस बदलाव को समझकर ही खाना जरूरी है। *किस माह में क्या खाएं?* 💐💐💐💐💐💐💐💐 जिस तरह पूर्वजों को बताया गया है कि चै...

🌕 शरद पूर्णिमा 2025: धन, सुख और सौभाग्य के लिए प्रभावी उपाय व टोटके

🌕 शरद पूर्णिमा 2025: धन, सुख और सौभाग्य के लिए प्रभावी उपाय व टोटके शरद पूर्णिमा हिन्दू पंचांग की अत्यंत शुभ रात मानी जाती है। इस दिन चंद्रमा पूर्ण तेजस के साथ आकाश में उदित होता है और उसकी चाँदनी में दिव्यता का अद्भुत संगम होता है। शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की रात्रि मानी जाती है और इस दिन किए गए उपाय शीघ्र फलदायी होते हैं। यह दिन धन प्राप्ति, स्वास्थ्य और मानसिक शांति के लिए सर्वोत्तम माना गया है। 🌼 शरद पूर्णिमा के प्रभावी उपाय और टोटके 1. लक्ष्मी पूजन और पीपल वृक्ष की आराधना सुबह-सुबह स्नान करके पीपल के पेड़ के नीचे माता लक्ष्मी का पूजन करें और उन्हें घर में निवास के लिए आमंत्रित करें। इससे लक्ष्मी कृपा घर में बनी रहती है। 2. भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा रात में भगवान विष्णु के साथ महालक्ष्मी की पूजा करें। यदि ब्राह्मण के माध्यम से पूजा कराई जाए तो इसका प्रभाव अधिक होता है। 3. चंद्रमा को दूध-चावल से अर्घ्य दें चंद्र उदय के बाद कच्चे दूध, चावल और चीनी के मिश्रण से चंद्रमा को अर्घ्य दें। मंत्र जप करें – “ओम स्त्रां स्त्रीं स्त्रों सः चंद्रमसे नमः।” ...