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अठारह पुराण

१ ब्रह्मपुराण - १०००० श्लोक
२ पद्मपुराण - ५५००० श्लोक
३ विष्णुपुराण -२३००० श्लोक
४ वायुपुराण  - २४६०० श्लोक
५ श्रीमद्भागवत-१८००० श्लोक
६ भविष्यपुराण -१४५०० श्लोक
७ नारदीयपुराण -२५००० श्लोक
८ मार्कण्डेयपुराण-९००० श्लोक
९ अग्निपुराण    - १६००० श्लोक
१० ब्रह्मवैवर्तपुराण-१८००० श्लोक
११ लिङ्गपुराण।   - ११००० श्लोक
१२ वराहपुराण    - २४००० श्लोक
१३ स्कन्दपुराण   - ८१००० श्लोक
१४ वामनपुराण   - १०००० श्लोक
१५ कूर्मपुराण     - १७००० श्लोक
१६ मत्स्यपुराण   -१४००० श्लोक
१७ गरुड़पुराण   -१९००० श्लोक
१८ ब्रह्माण्डपुराण -१२१०० श्लोक

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शिव नाम महिमा

भगवान् श्रीकृष्ण कहते है ‘महादेव महादेव’ कहनेवाले के पीछे पीछे मै नामश्रवण के लोभ से अत्यन्त डरता हुआ जाता हूं। जो शिव शब्द का उच्चारण करके प्राणों का त्याग करता है, वह कोटि जन्मों के पापों से छूटकर मुक्ति को प्राप्त करता है । शिव शब्द कल्याणवाची है और ‘कल्याण’ शब्द मुक्तिवाचक है, वह मुक्ति भगवन् शंकर से ही प्राप्त होती है, इसलिए वे शिव कहलाते है । धन तथा बान्धवो के नाश हो जानेके कारण शोकसागर मे मग्न हुआ मनुष्य ‘शिव’ शब्द का उच्चारण करके सब प्रकार के कल्याणको प्राप्त करता है । शि का अर्थ है पापोंका नाश करनेवाला और व कहते है मुक्ति देनेवाला। भगवान् शंकर मे ये दोनों गुण है इसीलिये वे शिव कहलाते है । शिव यह मङ्गलमय नाम जिसकी वाणी मे रहता है, उसके करोड़ जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है । शि का अर्थ है मङ्गल और व कहते है दाता को, इसलिये जो मङ्गलदाता है वही शिव है । भगवान् शिव विश्वभर के मनुष्योंका सदा ‘शं’ कल्याण करते है और ‘कल्याण’ मोक्ष को कहते है । इसीसे वे शंकर कहलाते है । ब्रह्मादि देवता तथा वेद का उपदेश करनेवाले जो कोई भी संसार मे महान कहलाते हैं उन सब के देव अर्थात् उपास्य होने...

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