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भगवान सूर्य के अष्टोत्तरशतनाम

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 🌞🌹🙏    *🙏🏻भगवान सूर्य के अष्टोत्तरशतनाम नाम (हिन्दी में)–ब्रह्माजी द्वारा बताए गए भगवान सूर्य के एक सौ आठ नाम जो स्वर्ग और मोक्ष देने वाले हैं, इस प्रकार हैं–*

१. सूर्य,
२. अर्यमा,
३. भग,
४. त्वष्टा,
५. पूषा (पोषक),
६. अर्क,
७. सविता,
८. रवि,
९. गभस्तिमान (किरणों वाले),
१०. अज (अजन्मा),
११. काल,
१२. मृत्यु,
१३. धाता (धारण करने वाले),
१४. प्रभाकर (प्रकाश का खजाना),
१५. पृथ्वी,
१६. आप् (जल),
१७. तेज,
१८. ख (आकाश),
१९. वायु,
२०. परायण (शरण देने वाले),
२१. सोम,
२२. बृहस्पति,
२३. शुक्र, २४. बुध,
२५. अंगारक (मंगल),
२६. इन्द्र, २७. विवस्वान्,
२८. दीप्तांशु (प्रज्वलित किरणों वाले),
२९. शुचि (पवित्र),
३०. सौरि (सूर्यपुत्र मनु),
३१. शनैश्चर, ३२. ब्रह्मा,
३३. विष्णु,
३४. रुद्र,
३५. स्कन्द (कार्तिकेय),
३६. वैश्रवण (कुबेर),
३७. यम,
३८. वैद्युताग्नि,
३९. जाठराग्नि,
४०. ऐन्धनाग्नि, 
४१. तेज:पति,
४२. धर्मध्वज,
४३. वेदकर्ता,
४४. वेदांग,
४५. वेदवाहन,
४६. कृत (सत्ययुग),
४७. त्रेता,
४८. द्वापर,
४९. सर्वामराश्रय कलि,
५०. कला, काष्ठा मुहूर्तरूप समय,
५१. क्षपा (रात्रि),
५२. याम (प्रहर),
५३. क्षण,
५४. संवत्सरकर,
५५. अश्वत्थ,
५६. कालचक्र प्रवर्तक विभावसु,
५७. शाश्वतपुरुष,
५८. योगी,
५९. व्यक्ताव्यक्त,
६०. सनातन,
६१. कालाध्यक्ष,
६२. प्रजाध्यक्ष,
६३. विश्वकर्मा,
६४. तमोनुद (अंधकार को भगाने वाले),
६५. वरुण,
६६. सागर,
६७. अंशु,
६८. जीमूत (मेघ),
६९. जीवन,
७०. अरिहा (शत्रुओं का नाश करने वाले),
७१. भूताश्रय,
७२. भूतपति,
७३. सर्वलोकनमस्कृत,
७४. स्रष्टा,
७५. संवर्तक,
७६. वह्नि,
७७. सर्वादि,
७८. अलोलुप (निर्लोभ),
७९.  अनन्त,
८०. कपिल,
८१. भानु,
८२. कामद,
८३. सर्वतोमुख, 
८४. जय, 
८५. विशाल,
८६. वरद,
८७. सर्वभूतनिषेवित,
८८. मन:सुपर्ण,
८९. भूतादि,
९०. शीघ्रग (शीघ्र चलने वाले),
९१. प्राणधारण,
९२. धन्वन्तरि,
९३. धूमकेतु,
९४. आदिदेव,
९५. अदितिपुत्र,
९६. द्वादशात्मा (बारह स्वरूपों वाले),
९७. अरविन्दाक्ष,
९८. पिता-माता-पितामह,
९९. स्वर्गद्वार-प्रजाद्वार,
१००. मोक्षद्वार,
१०१. देहकर्ता,
१०२. प्रशान्तात्मा,
१०३. विश्वात्मा,
१०४. विश्वतोमुख,
१०५. चराचरात्मा,
१०६. सूक्ष्मात्मा,
१०७. मैत्रेय,
१०८. करुणान्वित (दयालु)।

   *सूर्य के नामों की व्याख्या*👇🏿👇🏿

*सूर्य के अष्टोत्तरशतनामों में कुछ नाम ऐसे हैं जो उनकीपरब्रह्मरूपता प्रकट करते हैं जैसे–अश्वत्थ, शाश्वतपुरुष, सनातन, सर्वादि, अनन्त, प्रशान्तात्मा, विश्वात्मा, विश्वतोमुख, सर्वतोमुख, चराचरात्मा, सूक्ष्मात्मा।*

*सूर्य की त्रिदेवरूपता बताने वाले नाम हैं–ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, शौरि, वेदकर्ता, वेदवाहन, स्रष्टा, आदिदेव व पितामह। सूर्य से ही समस्त चराचर जगत का पोषण होता है और सूर्य में ही लय होता है, इसे बताने वाले सूर्य के नाम हैं–प्रजाध्यक्ष, विश्वकर्मा, जीवन, भूताश्रय, भूतपति, सर्वधातुनिषेविता, प्राणधारक, प्रजाद्वार, देहकर्ता और चराचरात्मा।*

*सूर्य का नाम काल है और वे काल के विभाजक है, इसलिए उनके नाम हैं–कृत, त्रेता, द्वापर, कलियुग, संवत्सरकर, दिन, रात्रि, याम, क्षण, कला, काष्ठा–मुहुर्तरूप समय।*

*सूर्य ग्रहपति हैं इसलिए एक सौ आठ नामों में सूर्य के सोम, अंगारक, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनैश्चर व धूमकेतु  नाम भी हैं।*

*उनका ‘व्यक्ताव्यक्त’ नाम यह दिखाता है कि वे शरीर धारण करके प्रकट हो जाते हैं। कामद, करुणान्वित नाम उनका देवत्व प्रकट करते हुए यह बताते हैं कि सूर्य की पूजा से इच्छाओं की पूर्ति होती है।*

*सूर्य के नाम मोक्षद्वार, स्वर्गद्वार व त्रिविष्टप यह प्रकट करते हैं कि सूर्योपासना से स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं। उत्तारायण सूर्य की प्रतीक्षा में भीष्मजी ने अट्ठावन दिन शरशय्या पर व्यतीत किए। गीता में कहा गया है–उत्तरायण में मरने वाले ब्रह्मलोक को प्राप्त करते हैं। सूर्य के सर्वलोकनमस्कृत नाम से स्पष्ट है कि सूर्यपूजा बहुत व्यापक है।*

*अमित तेजस्वी, सुवर्ण एवं अग्नि के समान कान्ति वाले भगवान सूर्य–जो देवगण, पितृगण एवं यक्षों के द्वारा सेवित हैं तथा असुर, निशाचर, सिद्ध एवं साध्य के द्वारा वन्दित हैं–के कीर्तन करने योग्य एक सौ आठ नाम हैं जिनका उपदेश साक्षात् ब्रह्मजी ने दिया है।*

*सूर्योदय के समय इस सूर्य-स्तोत्र का नित्य पाठ करने से व्यक्ति स्त्री, पुत्र, धन, रत्न, पूर्वजन्म की स्मृति, धैर्य व बुद्धि प्राप्त कर लेता है। उसके समस्त शोक दूर हो जाते हैं व सभी मनोरथों को भी प्राप्त कर लेता है*
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