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छप्पन भोग

1 रसगुल्ला
2 चन्द्रकला
3 रबड़ी
4 शूली
5 दही
6 भात : चावल या अक्षत
7 दाल
8 चटनी
9 कढ़ी
10 साग-कढ़ी
11 मठरी
12 बड़ा
13 कोणिका
14 पूरी
15 खजरा
16 अवलेह
17 वाटी
18 सिखरिणी
19 मुरब्बा
20 मधुर
21 कषाय
22 तिक्त
23 कटु पदार्थ
24 अम्ल (खट्टा पदार्थ)
25 शक्करपारा
26 घेवर
27 चिला
28 मालपुआ
29 जलेबी
30 मेसूब
31 पापड़
32 सीरा
33 मोहनथाल
34 लौंगपूरी
35 खुरमा
36 गेहूं दलिया
37 पारिखा
38 सौंफ़लघा
39 लड़्ड़ू
40 दुधीरुप
41 खीर
42 घी
43 मक्खन
44 मलाई
45 शाक
46 शहद
47 मोहनभोग
48 अचार
49 सूबत
50 मंड़का
51 फल
52 लस्सी
53 मठ्ठा
54 पान
55 सुपारी
56 इलायची

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शिव नाम महिमा

भगवान् श्रीकृष्ण कहते है ‘महादेव महादेव’ कहनेवाले के पीछे पीछे मै नामश्रवण के लोभ से अत्यन्त डरता हुआ जाता हूं। जो शिव शब्द का उच्चारण करके प्राणों का त्याग करता है, वह कोटि जन्मों के पापों से छूटकर मुक्ति को प्राप्त करता है । शिव शब्द कल्याणवाची है और ‘कल्याण’ शब्द मुक्तिवाचक है, वह मुक्ति भगवन् शंकर से ही प्राप्त होती है, इसलिए वे शिव कहलाते है । धन तथा बान्धवो के नाश हो जानेके कारण शोकसागर मे मग्न हुआ मनुष्य ‘शिव’ शब्द का उच्चारण करके सब प्रकार के कल्याणको प्राप्त करता है । शि का अर्थ है पापोंका नाश करनेवाला और व कहते है मुक्ति देनेवाला। भगवान् शंकर मे ये दोनों गुण है इसीलिये वे शिव कहलाते है । शिव यह मङ्गलमय नाम जिसकी वाणी मे रहता है, उसके करोड़ जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है । शि का अर्थ है मङ्गल और व कहते है दाता को, इसलिये जो मङ्गलदाता है वही शिव है । भगवान् शिव विश्वभर के मनुष्योंका सदा ‘शं’ कल्याण करते है और ‘कल्याण’ मोक्ष को कहते है । इसीसे वे शंकर कहलाते है । ब्रह्मादि देवता तथा वेद का उपदेश करनेवाले जो कोई भी संसार मे महान कहलाते हैं उन सब के देव अर्थात् उपास्य होने...

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