सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

तुलसी के औषधीय गुण

तुलसी के पौधे में कई औषधीय गुण भी मौजूद हैं. आयुर्वेद में
भी तुलसी के कई उपयोग बताए गए हैं. तुलसी के पौधे के कई उपयोग हैं और इसके फायदे हैं. जिससे हमें कई
रोगों में लड़ने में सहायता मिलती है. और यह हमें डॉक्टर के पास जाने से बचाता है. सबसे बड़ी बात यह है कि
तुलसी का कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं है और इसका उपयोग किसी भी उम्र का व्यक्ति कर सकता है. तो आइए
जानते हैं कि तुलसी के क्या-क्या फायदे हैं और इसका उपयोग किस-किस तरह से किया जा सकता है.
तुलसी के फायदे और उपयोग :
तुलसी के बीज को चूर्ण बनाकर दही के साथ खाने से खूनी बवासीर खत्म हो जाता है.
और तुलसी पत्ता मिला हुआ पानी पीने से कई बीमारियाँ ठीक हो जाती है और कई बीमारियाँ हमसे दूर रहती है.
मधु ( शहद ) में तुलसी की पत्तों का रस मिलाकर चाटने से चक्कर आना बंद हो जाता है.
तुलसी के कुछ पत्तों को सरसों तेल में भून लीजिए और फिर इसमें लहसुन का रस मिलाकर कान में डाल दीजिए.
इससे कान के दर्द में आराम मिलेगा.
अगर आपको आँखों में जलन की समस्या है, तो आपको हर रात में काली तुलसी का अर्क 2 बूंद आँखों में डालना चाहिए.
आपको अक्सर सिर दर्द की समस्या रहती है, तो दवा खाने से बेहतर है कि आप तुलसी का काढ़ा पिएँ.
अगर आपके साँसों से दुर्गन्ध आती है, तो तुलसी की कुछ सूखी पत्तियों को सरसों तेल में मिलाकर मुँह
धोने से आपकी समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी. यह उपाय पायरिया में भी उपयोगी है.
दाद, खुजली या त्वचा की इन्फेक्शन में तुलसी के अर्क को उस स्थान पर लगाने से फायदा पहुँचता है.
अगर आपके मुँह में संक्रमण हो गया हो, तो आपको हर दिन तुलसी के कुछ पत्ते चबाकर खाने चाहिए.
दिन में दो बार 10-12 तुलसी के पत्ते खाने से तनाव परेशान नहीं करता है.
जिन लोगों को दिल की बीमारी हो, उन्हें भी तुलसी पत्ते का नियमित सेवन करना चाहिए.
जिसके गुर्दे में पथरी हो गई हो, उसे शहद में मिलाकर तुलसी के अर्क का लगातार सेवन करना चाहिए.
छः महीने में असर दिखना शुरू हो जायेगा.
शहद, अदरक और तुलसी को मिलाकर बनाया गया काढ़ा ब्रोंकाइटिस, दमा, कफ और सर्दी में लाभदायक है.
नमक, लौंग और तुलसी के पत्तों को मिलाकर बनाया गया काढ़ा इंफ्लुएंजा में राहत देता है.
तुलसी का अर्क पीने से बुखार कम होता है.
जिन्हें ठंड जल्दी लग जाती हो, उन्हें तुलसी की 10-12 पत्तियों को एक कप दूध में उबालकर पीना चाहिए.

सर्दी-जुकाम होने पर तुलसी की पत्तियों को चाय में उबालकर पीना चाहिए.
तुलसी की पत्तियों को थोड़ी-थोड़ी देर में अदरक के साथ चबाने से खांसी-जुकाम से राहत मिलती है.
2 कप पानी में 1 चम्मच तुलसी की पत्तियों का पाउडर और एक चम्मच इलायची पाउडर मिलाकर उबालें और काढा बना लें.
एक दिन में 2-3 बार यह काढा पिएँ. आप इसमें दूध और चीनी भी मिला सकते हैं.
दस्त या गैस की समस्या होने पर 1 ग्लास पानी में 10-15 तुलसी की पत्तियाँ डालकर काढा बना लीजिए.
फिर इसमें चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीजिए.
एक चम्मच तुलसी की पिसी हुई पत्तियों को पानी के साथ मिलाकर इसका पेस्ट नाभि के आस-पास लगाने से आराम मिलता है.
जिन्हें लीवर में समस्या हो, उन्हें तुलसी की 10-12 पत्तियों को गर्म पानी से धोकर रोज सुबह खाना चाहिए.


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शिव नाम महिमा

भगवान् श्रीकृष्ण कहते है ‘महादेव महादेव’ कहनेवाले के पीछे पीछे मै नामश्रवण के लोभ से अत्यन्त डरता हुआ जाता हूं। जो शिव शब्द का उच्चारण करके प्राणों का त्याग करता है, वह कोटि जन्मों के पापों से छूटकर मुक्ति को प्राप्त करता है । शिव शब्द कल्याणवाची है और ‘कल्याण’ शब्द मुक्तिवाचक है, वह मुक्ति भगवन् शंकर से ही प्राप्त होती है, इसलिए वे शिव कहलाते है । धन तथा बान्धवो के नाश हो जानेके कारण शोकसागर मे मग्न हुआ मनुष्य ‘शिव’ शब्द का उच्चारण करके सब प्रकार के कल्याणको प्राप्त करता है । शि का अर्थ है पापोंका नाश करनेवाला और व कहते है मुक्ति देनेवाला। भगवान् शंकर मे ये दोनों गुण है इसीलिये वे शिव कहलाते है । शिव यह मङ्गलमय नाम जिसकी वाणी मे रहता है, उसके करोड़ जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है । शि का अर्थ है मङ्गल और व कहते है दाता को, इसलिये जो मङ्गलदाता है वही शिव है । भगवान् शिव विश्वभर के मनुष्योंका सदा ‘शं’ कल्याण करते है और ‘कल्याण’ मोक्ष को कहते है । इसीसे वे शंकर कहलाते है । ब्रह्मादि देवता तथा वेद का उपदेश करनेवाले जो कोई भी संसार मे महान कहलाते हैं उन सब के देव अर्थात् उपास्य होने...

श्रीशिव महिम्न: स्तोत्रम्

              __श्रीशिव महिम्न: स्तोत्रम्__ शिव महिम्न: स्तोत्रम शिव भक्तों का एक प्रिय मंत्र है| ४३ क्षन्दो के इस स्तोत्र में शिव के दिव्य स्वरूप एवं उनकी सादगी का वर्णन है| स्तोत्र का सृजन एक अनोखे असाधारण परिपेक्ष में किया गया था तथा शिव को प्रसन्न कर के उनसे क्षमा प्राप्ति की गई थी | कथा कुछ इस प्रकार के है … एक समय में चित्ररथ नाम का राजा था| वो परं शिव भक्त था| उसने एक अद्भुत सुंदर बागा का निर्माण करवाया| जिसमे विभिन्न प्रकार के पुष्प लगे थे| प्रत्येक दिन राजा उन पुष्पों से शिव जी की पूजा करते थे | फिर एक दिन … पुष्पदंत नामक के गन्धर्व उस राजा के उद्यान की तरफ से जा रहा था| उद्यान की सुंदरता ने उसे आकृष्ट कर लिया| मोहित पुष्पदंत ने बाग के पुष्पों को चुरा लिया| अगले दिन चित्ररथ को पूजा हेतु पुष्प प्राप्त नहीं हुए | पर ये तो आरम्भ मात्र था … बाग के सौंदर्य से मुग्ध पुष्पदंत प्रत्यक दिन पुष्प की चोरी करने लगा| इस रहश्य को सुलझाने के राजा के प्रत्येक प्रयास विफल रहे| पुष्पदंत अपने दिव्या शक्तियों के कारण अदृश्य बना रहा | और फिर … राजा च...

पिशाच भाष्य

पिशाच भाष्य  पिशाच के द्वारा लिखे गए भाष्य को पिशाच भाष्य कहते है , अब यह पिशाच है कौन ? तो यह पिशाच है हनुमानजी तो हनुमानजी कैसे हो गये पिशाच ? जबकि भुत पिशाच निकट नहीं आवे ...तो भीमसेन को जो वरदान दिया था हनुमानजी ने महाभारत के अनुसार और भगवान् राम ही कृष्ण बनकर आए थे तो अर्जुन के ध्वज पर हनुमानजी का चित्र था वहाँ से किलकारी भी मारते थे हनुमानजी कपि ध्वज कहा गया है या नहीं और भगवान् वहां सारथि का काम कर रहे थे तब गीता भगवान् ने सुना दी तो हनुमानजी ने कहा महाराज आपकी कृपा से मैंने भी गीता सुन ली भगवान् ने कहा कहाँ पर बैठकर सुनी तो कहा ऊपर ध्वज पर बैठकर तो वक्ता नीचे श्रोता ऊपर कहा - जा पिशाच हो जा हनुमानजी ने कहा लोग तो मेरा नाम लेकर भुत पिशाच को भगाते है आपने मुझे ही पिशाच होने का शाप दे दिया भगवान् ने कहा - तूने भूल की ऊपर बैठकर गीता सुनी अब इस पर जब तू भाष्य लिखेगा तो पिशाच योनी से मुक्त हो जाएगा तो हमलोगों की परंपरा में जो आठ टिकाए है संस्कृत में उनमे एक पिशाच भाष्य भी है !