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माखन चोर की टोली

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एक बार की बात है भगवान अपनी टोली के साथ तैयार हुए।
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भगवान के मित्र बने है सुबल, मंगल, सुमंगल, श्रीदामा, तोसन, आदि।
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भगवान सोच रहे है की आज किसके घर माखन चोरी की जाये।
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याद आया की “चिकसोले वाली” गोपी के घर चलते है।
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भगवान पहुंच गए सुबह सुबह और जोर से दरवाजा खटखटाने लगे।
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गोपी ने दरवाजा खोला। तो श्रीकृष्ण को खड़े देखा। बाल बिखेर रखे थे, मुह पर उबासी थी।
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गोपी बोली – ‘अरे लाला ! आज सुबह-सुबह यहाँ कैसे ?
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कन्हैया बोले – ‘गोपी क्या बताऊँ ! आज सुबह उठते ही, मैया ने कहा लाला तू चिकसोले वाली गोपी के घर चले जाओ....
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और उससे कहना आज हमारे घर में संत आ गए है मैंने तो ताजा माखन निकला नहीं,
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चिकसोले वाली गोपी तो भोर में उठ जावे है। ताजो माखन निकल लेवे है। तू उनसे जाकर माखन ले आ।
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और कहना कि एक मटकी माखन दे दो, बदले में दो मटकी माखन लौटा दूँगी।
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गोपी बोली – लाला ! मै अभी माखन की मटकी लाती हूँ और मैया से कह देना कि लौटने की जरुरत नहीं है संतो की सेवा मेरी तरफ से हो जायेगी।
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झट गोपी अंदर गयी और माखन की मटकी लाई और बोली – लाला ये माखन लो और ये मिश्री भी ले जाओ।
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कन्हैया माखन लेकर बाहर आ गए और गोपी ने दरवाजा बंद कर लिया।
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अब भगवान ने अपने सभी दोस्तों को बुलाया है और कहते है आओ आओ श्रीदामा, मंगल, सुबल, जल्दी आओ,
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सब-के-सब झट से बाहर आ गए भगवान बोले,” जिसके यहाँ चोरी की हो उसके दरवाजे पर बैठकर खाने में ही आनंद आता है, और वो चोरी भी नहीं कहलाती है।”
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झट सभी गोपी के दरवाजे के बाहर बैठ गए, भगवान ने सबकी पत्तल पर माखन और मिश्री रख दी। और बीच में स्वयं बैठ गए।
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सभी सखा माखन और मिश्री खाने लगे।
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माखन के खाने से होंठो की पट पट और मिश्री के खाने से दाँतो के कट-कट की आवाज जब गोपी ने सुनी तो सोचा ये आवाज कहाँ से आ रही है, कोई बंदर तो घर में नही आ गयो है।
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जैसे ही उसने दरवाजा खोला तो सारे मित्रों के साथ श्रीकृष्ण बैठे माखन खा रहे थे।
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गोपी बोली – ‘क्यों रे कन्हैया ! माखन संतो को चाहिए था या इन संड -भुसंडान को।
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भगवान बोले देख गोपी गाली मत दीजो। ये भी संत है, साधु है। और तो और नागा साधु है किसी के तन पर कोई वस्त्र तक नहीं है।
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तुझे तो इनको प्रणाम करना चाहिए और वो भी दंडवत (लेट कर)।
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गोपी बोली अच्छा अभी दण्डोत करती हूँ। एक डंडा ले आउ फिर अच्छे से डंडे से दण्डोत करुँगी।
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भगवान बोले सबको बेटा माखन बहुत खा लिए है अब पीटने का नंबर है। भागो सभी अपने-अपने घर को।
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इस प्रकार भगवान ब्रज में सुन्दर लीला कर रहे है और सबको अपने रूप मधुरए से सराबोर कर रहे है।
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 (((((((((( जय जय श्री राधे ))))))))))
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