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शास्त्रों के अनुसार महिलाओं के प्रकार

भारतीय शास्त्रों में रूप, गुण व आदतों के अनुसार महिलाओं को चार श्रेणियों में बांटा है| पद्मिनी, चित्रणी, हस्तिनी व संखिणी| महिलाओं की इन चार श्रेणियों पर विभिन्न काल में विभिन्न साहित्यकारों द्वारा बहुत कुछ लिखा गया है| प्रस्तुत है इसी सम्बन्ध में किसी साहित्यकार (शायद जायसी) द्वारा लिखी इन श्रेणियों पर काव्य रचना !!

पद्मिनी पद्म गन्धा च पुष्प गन्धा च चित्रणी|
हस्तिनी मच्छ गन्धा च दुर्गन्धा भावेत्संखणी||

पद्मिनी की काया कमल की भाँती सुगन्धित होती है तो चित्रणी फूलों की महक लिये, हस्तिनी में मछली की महक आती है तो संखिणी में दुर्गन्ध आती है|

पद्मिनी स्वामिभक्त च पुत्रभक्त च चित्रणी|
हस्तिनी मातृभक्त च आत्मभक्त च संखिणी ||

पद्मिनी पतिभक्त होती है तो चित्रणी पुत्र भक्त, हस्तिनी अपनी माँ की भक्त होती है वहीं संखिणी केवल अपनी भक्त होती है|

पद्मिनी करलकेशा च लम्बकेशा च चित्रणी |
हस्तिनी उर्द्धकेशा च लठरकेशा च संखिणी ||

पद्मिनी के केश घुंघराले होते है, चित्रनी के लम्बे, हस्तिनी के खुरदरे तो संखिणी के उलझे हुए|

पद्मिनी चन्द्रवदना च सूर्यवदना च चित्रणी |
हस्तिनी पद्मवदना च शुकरवदना च संखिणी ||

पद्मिनी की काया चंद्रमा की तरह होती है वहीं चित्रणी की काया सूर्य के समान, हस्तिनी कमल के समान तो संखिणी की काया कुत्ते के समान|

पद्मिनी हंसवाणी च कोकिलावाणी च चित्रणी |
हस्तिनी काकवाणी च गर्दभवाणी च संखिणी ||

पद्मिनी की वाणी हंस के समान, चित्रणी की कोयल के समान, हस्तिनी की वाणी कौवे के समान तो संखिणी की वाणी गधे सरीखी होती है|
पद्मिनी पावाहारा च द्विपावाहारा च चित्रणी |

त्रिपदा हारा हस्तिनी ज्ञेया परं हारा च संखिणी ||

पद्मिनी की खुराक बहुत ही कम होती है, चित्रणी की उससे दुगुनी, हस्तिनी की तिगुनी तो संखिणी दूसरों का हिस्सा भी खा जाती है|
चतु वर्षे प्रसूति पद्मन्या त्रय वर्षाश्च चित्रणी |

द्वि वर्षा हस्तिनी प्रसूतं प्रति वर्ष च संखिणी ||

पद्मिनी चार वर्ष के अंतराल बाद र्भधारण कर संतान को जन्म देती है, चित्रणी तीन वर्ष में एक बार हस्तिनी दो वर्ष में वहीं संखिणी हर वर्ष गर्भधारण कर संतान को जन्म देती है|

पद्मिनी श्वेत श्रृंगारा, रक्त श्रृंगारा चित्रणी |
हस्तिनी नील श्रृंगारा, कृष्ण श्रृंगारा च संखिणी ||

पद्मिनी श्वेत वस्त्र या श्रंगार पसंद करती है, चित्रणी ला, हस्तिनी नीला तो संखिणी काला पसंद करती है|

पद्मिनी पान राचन्ति, वित्त राचन्ति चित्रणी |
हस्तिनी दान राचन्ति, कलह राचन्ति संखिणी ||

पद्मिनी पान की शौक़ीन होती है तो चित्रणी धन की, हस्तिनी दान की तो संखिणी को कलह करने का शौक होता है|

पद्मिनी प्रहन निंद्रा च, द्वि प्रहर निंद्रा च चित्रणी |
हस्तिनी प्रहर निंद्रा च, अघोर निंद्रा च संखिणी ||

पद्मिनी दिन में सिर्फ एक बार सोती है, चित्रणी दो बार, हस्तिनी तीन बार तो संखिणी को हर सोते रहने रहना चाहती है|

चक्रस्थन्यो च पद्मिन्या, समस्थनी च चित्रणी|
उद्धस्थनी च हस्तिन्या दीघस्थानी संखिणी||

पद्मिनी गोल स्तन धारण किये होती है, चित्रणी के आनुपातिक, हस्तिनी के छोटे और संखिणी के लंबे स्तन होते है|

पद्मिनी हारदंता च, समदंता च चित्रणी|
हस्तिनी दिर्घदंता च, वक्रदंता च संखिणी||

पद्मिनी के दांत माला की तरह होते है, चित्रणी के एक समान, हस्तिनी के लंबे तो संखिणी के अटपटे, टेढ़े-मेढ़े होते है|

पद्मिनी मुख सौरभ्यं, उर सौरभ्यं चित्रणी|
हस्तिनी कटि सौरभ्यं, नास्ति गंधा च संखिणी||

पद्मिनी की रौनक या कांति उसके चेहरे से झलकती है तो चित्रणी की उसके स्तनों से, हस्तिनी की कमर से तो संखिणी में किसी तरह की रौनक या कांति होती ही नहीं|

पद्मिनी पान राचन्ति, फल राचन्ति चित्रणी|
हस्तिनी मिष्ट राचन्ति, अन्न राचन्ति संखिणी||

पद्मिनी पान की शौक़ीन, चित्रणी फल की, हस्तिनी मिठाई की संखिणी अनाज की|

पद्मिनी प्रेम वांछन्ति, मान वांछन्ति चित्रणी |
हस्तिनी दान वांछन्ति, कलह वांछन्ति संखिणी ||

पद्मिनी के मन में प्रेम पाने की इच्छा रहती हैं चित्रणी को मान-सम्मान की, हस्तिनी को दान की तो संखिणी को कलह करने की|

महापुण्येन पद्मिन्या, मध्यम पुण्येन चित्रणी |
हस्तिनी च क्रियालोपे, अघोर पापेन संखिणी ||

पद्मिनी महापुण्य में विश्वास रखती है, चित्रणी साधारण पूण्य में, हस्तिनी संसार में तो संखिणी घोर पाप करने में|

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