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जामुन के फायदे और बेहतरीन औषधीय गुण

जामुन के फायदे और बेहतरीन औषधीय गुण-

जामुन की तासीर ठंडी होती है और इसकी कई देसी विदेशी किस्मे होती हैं | लेकिन सबके धर्म, गुण समान हैं। जामुन का अंग्रेजी नाम – Java Plum और Blackberry है | जामुन से भूख बढती है और भोजन पचाती है, शरीर से गंदगी बाहर निकलती है। जामुन नहीं होने पर इसका सिरका काम में ले सकते हैं। यह मोटी और पकी हुई अच्छी होती है। इसका खट्टापन और अम्लीय गुण रक्त-दोषों को दूर करते है।
खट्टा-मीठा जामुन केवल फल ही नहीं औषधि भी है |

स्मरण-शक्तिवर्धक – मस्तिष्क की कोशिकाओं की क्षमता घटने से स्मरणशक्ति कमजोर हो जाती है। जामुन में एंटी ऑक्सीडेन्ट्स विशेष रूप से फ्लेबोनायड्स मिलते हैं जो स्मरण-शक्ति ठीक रखने में सहायक है।

आग से जले के सफेद दागों पर जामुन के पत्तों का प्रतिदिन लेप करने से दाग ठीक हो जाते हैं।
जामुन खाने से चेहरे के मुँहासे मिट जाते हैं। इसकी गुठलियों को पानी डालकर, पीसकर चेहरे पर लेप करके आधे घंटे बाद धोने से मुँहासों से छुटकारा मिलेगा।

जामुन का चूर्ण और मिश्री (पिसी) करीब 15 ग्राम की मात्रा में प्रात: सायं दूध के साथ लेने से हर प्रकार की कमजोरी दूर होती है|

मधुमेह के रोगियों को हर रोज 150 ग्राम जामुन खाना चाहिए। जामुन के नियमित सेवन से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है।

होम्योपैथी में मधुमेह के लिए जामुन का रस सीजीजीयम जेम्बोलिनम मदर टिंचर के नाम से काम में लिया जाता है। तीन बार जामुन की गुठली का चूर्ण एक-एक चम्मच सुबह-दोपहर-शाम पानी के साथ लेने से शर्करा आना ठीक हो जाता है। इसके साथ ही आम की गुठली का चूर्ण तीन-तीन ग्राम की मात्रा में पानी से लें।
जामुन (ब्लैकबेरी) की गुठली मधुमेह के लिए रामबाण है। गुठली का पाउडर निर्धारित मात्रा में ही लें, अधिक मात्रा में लेना हानिप्रद है।
जामुन खाना खाने के बाद खायें। तथा इसके सेवन से दो घंटे पूर्व व पश्चात् तक दूध नहीं पियें। दो घंटे के बाद ही दूध पियें।
ब्लैकबेरी में आयरन होता है जो रक्त के लिए काफी जरुरी तत्व होता है ।
हृदय रोगों में भी इसका सेवन लाभदायक है।
अगर शरीर पर कोई फफोला, जलन, घाव हो जाते हैं तो इसकी गुठली पानी में पीसकर रोजाना दो बार लगाने से ये घाव ठीक हो जाते हैं
200 ग्राम ब्लैकबेरी एक गिलास उबलते हुए पानी में डालकर कुछ देर उबालें। फिर उतार कर ठंडा होने दें। इसी पानी में उन्हें मथकर, छानकर एक चम्मच शहद मिलाकर हर रोज तीन बार पियें। इससे शरीर का दुबलापन और मधुमेह रोग में लाभ होता है।
जामुनों को धूप में सुखाकर पीस लें। इस पाउडर की तीन चम्मच हर रोज तीन बार पानी के साथ लेने से भी मधुमेह में लाभ होता है।
पेट की बीमारियों में ब्लैकबेरी लाभदायक है। पेट दर्द, दस्त होने पर इसके रस में सेंधा नमक मिलाकर पीना चाहिए।
अपच होने पर (1) 100 ग्राम ब्लैकबेरी पर नमक डालकर हर रोज खायें। एक कप पानी में एक चम्मच ब्लैकबेरी का सिरका डालकर हर रोज तीन बार पियें। इससे पेट के प्रायः सभी सामान्य रोग ठीक हो जाते हैं। भूख अच्छी लगती है।
पेट दर्द होने पर एक कप पानी में एक चम्मच जामुन का सिरका, जरा-सा काला नमक मिलाकर पियें।
बार-बार होने वाले दस्तों में जामुन के कोमल पत्तों का दस ग्राम रस लेकर थोड़े से शहद में मिलाकर दिन में तीन बार लेने से काफी लाभ होता है। केवल इसका रस पीने से भी दस्त बन्द हो जाते हैं।
सावधानी – जामुन को खाली पेट खाना अच्छा नहीं है। इसको खाना खाने के बाद लेना लाभदायक है। इसको ज्यादा मात्रा में खाने से हानि होती है।
फोड़े-फुसी, मुंहासे हों तो हर रोज दो सौ ग्राम ब्लैकबेरी खायें। गुठली दूध में पीसकर लगायें।
दाँतों के रोग – यदि आपके दाँतों में दर्द है, रक्त निकलता है, दाँत हिलते हैं, मसूड़े फूलते हैं तो 50 ग्राम ब्लैकबेरी के नये मुलायम, कच्चे पत्ते टुकड़े करके चौथाई चम्मच पिसी कालीमिर्च दो गिलास पानी में उबालकर, छानकर हर रोज दो बार कुल्ले करें। इसकी छाल बारीक पीस कर हर रोज  मंजन करें।
मुंह के छाले – जामुन के 40 नरम पत्तों को पीसकर एक गिलास पानी में घोल लें, छानकर कुल्ले व गरारे करें, मुँह के छाले बहुत जल्दी ठीक हो जायेंगे। इसको खाने से भी छाले ठीक हो जाते हैं। पानी में सिरका डालकर भी कुल्ले कर सकते हैं।
जामुन का शर्बत पीने से थकान दूर होकर ताजगी अनुभव होती है
जामुन का सिरका सौंदयवर्धक होता है। इसको नियमित पीने से स्री, पुरुष, बच्चों का सौन्दर्य बढ़ता है। एक कप पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर पियें।
इसके फल में खून को साफ करने वाले कई गुण होते हैं।
सिरका स्वाद में खट्टा होता है। अतः सिरके को पीने योग्य बनाने के लिए आवश्यकतानुसार पानी मिलायें। इससे भूख बढ़ती है और पुराने पेट के रोग भी ठीक हो जाते हैं। कमजोरी दूर होती है। इसका सिरका बाजार में भी मिलता है।
जामुन का रस निकालने की विधि – जामुनों को दो घंटे पानी में पड़ी रखने के बाद गुठलियाँ निकाल कर रस निकालें।

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