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श्रीमान माधव गौड़ेश्वर वैष्णव परम्परा

भगवान श्रीमानारायण भगवान ब्रह्मा
देवरर्षी नारद कृष्ण-दुवेयना यानी वेद-व्यास
जगदगुगु श्री माधवचारी श्री नरहरी
श्री माधव श्री अशोभ
श्री जयाधिथ श्री ज्ञानसिंहु
श्री दयानिधि श्री विदनिधि
श्री राजेन्द्र श्री जयधर्म
श्री प्रशुतोम श्री ब्रह्मांण्य
श्री व्यास-तिर्थ श्री लक्ष्मी पति
श्री माधवेंद्र पुरी श्री ईश्वर पुरी
श्री चिंतन महाप्रभु श्री गोपाल भट्टा गोस्वामी
श्री दामोदर दास गोस्वामी श्री मथुरा नाथ गोस्वामी
श्री विष्णु दास गोस्वामी श्री मेघश्याम गोस्वामी
श्री रघुनाथ दास गोस्वामी श्री देवकी नंदन गोस्वामी
श्री राधा लाल गोस्वामी श्री गिरधरलाल गोस्वामी
श्री गुलबाल गोस्वामी श्री मुरलीधर गोस्वामी
श्री प्रीतम लाल गोस्वामी श्री मनीलाल गोस्वामी
श्री विजय कृष्ण गोस्वामी श्री अतुल कृष्ण गोस्वामी
श्री श्रीकृष्ण गोस्वामी

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श्रीशिव महिम्न: स्तोत्रम्

              __श्रीशिव महिम्न: स्तोत्रम्__ शिव महिम्न: स्तोत्रम शिव भक्तों का एक प्रिय मंत्र है| ४३ क्षन्दो के इस स्तोत्र में शिव के दिव्य स्वरूप एवं उनकी सादगी का वर्णन है| स्तोत्र का सृजन एक अनोखे असाधारण परिपेक्ष में किया गया था तथा शिव को प्रसन्न कर के उनसे क्षमा प्राप्ति की गई थी | कथा कुछ इस प्रकार के है … एक समय में चित्ररथ नाम का राजा था| वो परं शिव भक्त था| उसने एक अद्भुत सुंदर बागा का निर्माण करवाया| जिसमे विभिन्न प्रकार के पुष्प लगे थे| प्रत्येक दिन राजा उन पुष्पों से शिव जी की पूजा करते थे | फिर एक दिन … पुष्पदंत नामक के गन्धर्व उस राजा के उद्यान की तरफ से जा रहा था| उद्यान की सुंदरता ने उसे आकृष्ट कर लिया| मोहित पुष्पदंत ने बाग के पुष्पों को चुरा लिया| अगले दिन चित्ररथ को पूजा हेतु पुष्प प्राप्त नहीं हुए | पर ये तो आरम्भ मात्र था … बाग के सौंदर्य से मुग्ध पुष्पदंत प्रत्यक दिन पुष्प की चोरी करने लगा| इस रहश्य को सुलझाने के राजा के प्रत्येक प्रयास विफल रहे| पुष्पदंत अपने दिव्या शक्तियों के कारण अदृश्य बना रहा | और फिर … राजा च...

शिव नाम महिमा

भगवान् श्रीकृष्ण कहते है ‘महादेव महादेव’ कहनेवाले के पीछे पीछे मै नामश्रवण के लोभ से अत्यन्त डरता हुआ जाता हूं। जो शिव शब्द का उच्चारण करके प्राणों का त्याग करता है, वह कोटि जन्मों के पापों से छूटकर मुक्ति को प्राप्त करता है । शिव शब्द कल्याणवाची है और ‘कल्याण’ शब्द मुक्तिवाचक है, वह मुक्ति भगवन् शंकर से ही प्राप्त होती है, इसलिए वे शिव कहलाते है । धन तथा बान्धवो के नाश हो जानेके कारण शोकसागर मे मग्न हुआ मनुष्य ‘शिव’ शब्द का उच्चारण करके सब प्रकार के कल्याणको प्राप्त करता है । शि का अर्थ है पापोंका नाश करनेवाला और व कहते है मुक्ति देनेवाला। भगवान् शंकर मे ये दोनों गुण है इसीलिये वे शिव कहलाते है । शिव यह मङ्गलमय नाम जिसकी वाणी मे रहता है, उसके करोड़ जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है । शि का अर्थ है मङ्गल और व कहते है दाता को, इसलिये जो मङ्गलदाता है वही शिव है । भगवान् शिव विश्वभर के मनुष्योंका सदा ‘शं’ कल्याण करते है और ‘कल्याण’ मोक्ष को कहते है । इसीसे वे शंकर कहलाते है । ब्रह्मादि देवता तथा वेद का उपदेश करनेवाले जो कोई भी संसार मे महान कहलाते हैं उन सब के देव अर्थात् उपास्य होने...

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