सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हार्ट अटैक अाने से एक महीना पहले बॉडी देती है ये 8 संकेत!

 हार्ट अटैक अब एक अाम सी समस्या बन गई है पहले यह समस्या अधिक उम्र के लोगों को होती थी लेकिन अब इसका शिकार हर छोटा-बड़ा इंसान हो रहे है। हार्ट अटैक होने के भी बहुत से कारण होते है लेकिन क्या अापको पता हार्ट अटैक अाने से  एक महीना पहले ही हमारे शरीर संकेत देने लगता है। अाइए जानते है इसके संकेत...

1. पैरों की सूजन

हार्ट प्रॉबल्म होने पर हार्ट पूरे सही ढंग से शरीर में रक्त का संचार नहीं कर पाता जिससे पैरों में सूजन होने लगती है।

2.इनडाइजेशन अौर उल्टी

इनडाइजेशन अौर बार-बार कच्चा मन होने का एहसास या उल्टी हो जाना। यह सब हार्ट अटैक के संकेत हो सकते हैं।

3.थकावट महसूस होना

अगर हमेशा कमजोरी फिल होती है अौर जब छोटा-मोटा काम करते समय थकावट महसूस होने लगती है तो यह हार्ट प्रॉबल्म हो सकती हैं।

4. चेस्ट या पीठ का दर्द

अगर अाप लगातार चेस्ट या पीठ के दर्द से परेशान रहते है तो इसके नजरअंदाज बिल्कुल भी न करें अौर डॉक्यर की सलाह लें।

5.सांस लेने में दिक्कत

हार्ट प्रॉबल्म का एक कारण यह भी हो सकता है कि अापको सांस लेने में दिक्कत होने लगें अौर अचानक से ही दिल की धड़कने तेज हो जाएं।

6. सिर,गर्दन या दांतों में दर्द

अापका ज्यादातर सिर में दर्द रहना भी हार्ट प्रॉबल्म का संकेत हो सकता है अौर पेट के ऊपरी हिस्से, बाय हाथ, गर्दन या दांतों में बिना किसी कारण दर्द होना। इन सब बातों को अनदेखा बिल्कुल न करें।

7.सीने में दबाव महसूस होना

अगर सीने में दबाव सा महसूस हो या एेसा लगे कि सीने पर कुछ भारी चीज रखी है तो यह भी हार्ट की समस्या हो सकती है।

8. बैचेनी अौर चक्कर

अापको बैचेनी सी फिल हो रही है या एेसा लगे की अभी चक्कर खाकर गिर जाएंगे तो यह हार्ट प्रॉबल्म होनो से पहले वाले संकेत है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शिव नाम महिमा

भगवान् श्रीकृष्ण कहते है ‘महादेव महादेव’ कहनेवाले के पीछे पीछे मै नामश्रवण के लोभ से अत्यन्त डरता हुआ जाता हूं। जो शिव शब्द का उच्चारण करके प्राणों का त्याग करता है, वह कोटि जन्मों के पापों से छूटकर मुक्ति को प्राप्त करता है । शिव शब्द कल्याणवाची है और ‘कल्याण’ शब्द मुक्तिवाचक है, वह मुक्ति भगवन् शंकर से ही प्राप्त होती है, इसलिए वे शिव कहलाते है । धन तथा बान्धवो के नाश हो जानेके कारण शोकसागर मे मग्न हुआ मनुष्य ‘शिव’ शब्द का उच्चारण करके सब प्रकार के कल्याणको प्राप्त करता है । शि का अर्थ है पापोंका नाश करनेवाला और व कहते है मुक्ति देनेवाला। भगवान् शंकर मे ये दोनों गुण है इसीलिये वे शिव कहलाते है । शिव यह मङ्गलमय नाम जिसकी वाणी मे रहता है, उसके करोड़ जन्मों के पाप नष्ट हो जाते है । शि का अर्थ है मङ्गल और व कहते है दाता को, इसलिये जो मङ्गलदाता है वही शिव है । भगवान् शिव विश्वभर के मनुष्योंका सदा ‘शं’ कल्याण करते है और ‘कल्याण’ मोक्ष को कहते है । इसीसे वे शंकर कहलाते है । ब्रह्मादि देवता तथा वेद का उपदेश करनेवाले जो कोई भी संसार मे महान कहलाते हैं उन सब के देव अर्थात् उपास्य होने...

पिशाच भाष्य

पिशाच भाष्य  पिशाच के द्वारा लिखे गए भाष्य को पिशाच भाष्य कहते है , अब यह पिशाच है कौन ? तो यह पिशाच है हनुमानजी तो हनुमानजी कैसे हो गये पिशाच ? जबकि भुत पिशाच निकट नहीं आवे ...तो भीमसेन को जो वरदान दिया था हनुमानजी ने महाभारत के अनुसार और भगवान् राम ही कृष्ण बनकर आए थे तो अर्जुन के ध्वज पर हनुमानजी का चित्र था वहाँ से किलकारी भी मारते थे हनुमानजी कपि ध्वज कहा गया है या नहीं और भगवान् वहां सारथि का काम कर रहे थे तब गीता भगवान् ने सुना दी तो हनुमानजी ने कहा महाराज आपकी कृपा से मैंने भी गीता सुन ली भगवान् ने कहा कहाँ पर बैठकर सुनी तो कहा ऊपर ध्वज पर बैठकर तो वक्ता नीचे श्रोता ऊपर कहा - जा पिशाच हो जा हनुमानजी ने कहा लोग तो मेरा नाम लेकर भुत पिशाच को भगाते है आपने मुझे ही पिशाच होने का शाप दे दिया भगवान् ने कहा - तूने भूल की ऊपर बैठकर गीता सुनी अब इस पर जब तू भाष्य लिखेगा तो पिशाच योनी से मुक्त हो जाएगा तो हमलोगों की परंपरा में जो आठ टिकाए है संस्कृत में उनमे एक पिशाच भाष्य भी है !

श्रीशिव महिम्न: स्तोत्रम्

              __श्रीशिव महिम्न: स्तोत्रम्__ शिव महिम्न: स्तोत्रम शिव भक्तों का एक प्रिय मंत्र है| ४३ क्षन्दो के इस स्तोत्र में शिव के दिव्य स्वरूप एवं उनकी सादगी का वर्णन है| स्तोत्र का सृजन एक अनोखे असाधारण परिपेक्ष में किया गया था तथा शिव को प्रसन्न कर के उनसे क्षमा प्राप्ति की गई थी | कथा कुछ इस प्रकार के है … एक समय में चित्ररथ नाम का राजा था| वो परं शिव भक्त था| उसने एक अद्भुत सुंदर बागा का निर्माण करवाया| जिसमे विभिन्न प्रकार के पुष्प लगे थे| प्रत्येक दिन राजा उन पुष्पों से शिव जी की पूजा करते थे | फिर एक दिन … पुष्पदंत नामक के गन्धर्व उस राजा के उद्यान की तरफ से जा रहा था| उद्यान की सुंदरता ने उसे आकृष्ट कर लिया| मोहित पुष्पदंत ने बाग के पुष्पों को चुरा लिया| अगले दिन चित्ररथ को पूजा हेतु पुष्प प्राप्त नहीं हुए | पर ये तो आरम्भ मात्र था … बाग के सौंदर्य से मुग्ध पुष्पदंत प्रत्यक दिन पुष्प की चोरी करने लगा| इस रहश्य को सुलझाने के राजा के प्रत्येक प्रयास विफल रहे| पुष्पदंत अपने दिव्या शक्तियों के कारण अदृश्य बना रहा | और फिर … राजा च...