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भूल से भी कभी अर्पण न करें शिवलिंग पर यह चीजें

भूल से भी कभी  अर्पण न करें शिवलिंग पर यह चीजें

सावन का पवित्र माह चल रहा हैं । हर शिव भक्त आपनी मनोकामना पूरी करने के लिए शिवजी के आराधना कर रहे हैं। शिवजी को अभिषेक बहुत  पसन्द हैं , इसलिए लोग तरह तरह के सामग्रियों से शिवजी का अभिषेक कर रहें हैं। लोग आपनी मनोबान्छा को पूर्ण करने हेतु शिवजी पर कई सारे चीज अर्पण कर रहें हैं। परन्तु आप कहीं ऐसा कोई चीज शिवजी पर अर्पण तो नहीं कर रहें हैं , जिसका शिवलिंग पर अर्पण करना बर्जित हैं??? शिव पुराण में ऐसा कुछ चीजों के वारे में वर्णित हैं , जिनको शिवलिंग पर अर्पण करने को मना किया गया हैं। चलिए जानतें वह सब क्या हैं और क्यों बर्जित हैं!!
1. केतकी फूल
केतकी फूल कभी भी शिवलिंग पर अर्पण नहीं किया जाता हैं। केतकी फूल को स्वयं शिवजी ने श्राप दिये थे की वह कभी भी शिवलिंग पर नहीं चढाया जाएगी*  ।
कारण
एक वार ब्रह्मा और बिष्णु के बीच बहस हुआ। दोनों ही आपने आप को श्रेष्ठ कह रहें थे। दोनों समाधान के लिए शिवजी के पास गयें। शिवजी ने ज्योतिर्लिंग की रचना की और दोनों को इसके अंत को ढूंढने को कहा। बिष्णुजी ने अपनी हार स्वीकार कर लिए। परन्तु ब्रह्मा जी ने कहा की , उन्होने अंत देखा हैं। और इस बात में केतकी ने झूठी गवाही दी थी। इस झूठ से क्रोधित होकर महादेव केतकी फूल को शिवलिंग पर अर्पित न होने का श्राप दिये।  तब से केतकी फूल शिव पूजा में बर्जित हैं।
2. हल्दी/कुमकुम्
हल्दी और कुमकुम महिलाऔं की शृंगार सामग्री हैं। शिव लिंग पुरूषत्व का प्रतीक हैं । इसलिए शिवलिंग पर हल्दी , कुमकुम् लगाना बर्जित हैं।
3. शंख
शिवलिंग पर शंख से पानी चढाना बर्जित हैं।
कारण
शिवजी ने शंखचूड दैत्य को बध किये थे। शिवजी ने शंखचूड को भस्म किये थे और उसके हड्डियों से शंख वना था। इसलिए शिवजी को शंख से पानी चढाना बर्जित हैं।
4.तुलसी के पत्ती
तुलसी के पत्ती शिवजी पर चढाया नहीं जाता हैं।
कारण
शिवजी ने तुलसी के पति जालन्धर का बध किये थे।इसलिए तुलसी माता ने अपनी पवित्र पत्तों को शिवजी पर चढाने को मना किये हैं।
5. नारियल का पानी
शिवजी पर नारियल का पानी चढाना मना हैं।
कारण
जो चीज शिवलिंग पर अर्पण किया जाता हैं , वह नैवेद्य हो जाता हैं , जिसे भक्षण नहीं किया जाता हैं। परन्तु भगवान को अर्पण करने के बाद नारियल पानी को ग्रहण करने का नियम हैं। इसलिए शिवलिंग पर नारियल पानी चढाना बर्जित हैं।

     

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